
नेपाल में हाल ही में हुए Gen Z प्रदर्शन और तख्तापलट के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। रूसी टीवी चैनल आरटी को दिए इंटरव्यू में ओली ने दावा किया कि यह आंदोलन अपने आप नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया गया तख्तापलट था।
ओली ने कहा कि वह श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुए प्रदर्शनों में समानता देखते हैं और यह खतरा कई सालों से था। उन्होंने स्वीकार किया कि हालात को पढ़ने में पूरी तरह से चूक हुई, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वह देश छोड़कर नहीं जा रहे हैं और जनता पर भरोसा करते हैं।
प्रदर्शन और हिंसा के पीछे की साजिश
ओली ने बताया कि उनके घर पर हमला नहीं हुआ, बल्कि यह एक सार्वजनिक म्यूजियम था, जिसमें उनके कुछ दस्तावेज और किताबें रखी हुई थीं।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पैसा लेकर हिंसा कराने का आरोप लगाया और कहा कि यह हमारी संस्कृति नहीं है।
ओली ने जोर देकर कहा कि यह प्रदर्शन नेपाल के लोकतंत्र को कमजोर करने और खत्म करने के लिए किया गया था।
चीन और भारत के साथ नेपाल की नीति
ओली ने चीन से करीबी को लेकर सवाल पर कहा कि वह शांति के समर्थक हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री के नाते चीन और भारत दोनों के साथ दोस्ती बनाई और कोई भी पड़ोसी दुश्मन नहीं है। उनकी नीति है कि नेपाल की जमीन किसी भी पड़ोसी के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी।
राजनीतिक संकट और बालेन शाह
ओली ने कहा कि उनके विरोधी और Gen Z प्रदर्शनकारियों के नेता बालेन शाह को राजनीतिक दल बनाना अच्छी बात है, लेकिन उन्हें उत्तरदायी होना होगा।
Gen Z प्रदर्शन के बाद सुशील कार्की प्रधानमंत्री बनी हैं, और आगामी चुनाव में बालेन शाह प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
नेपाल में राजनीतिक सत्ता की लड़ाई में ओली अब अपनी पार्टी और गढ़ की रक्षा की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
ओली ने साफ कहा कि वह फिर से संविधान लागू करना चाहते हैं और देश की लोकतांत्रिक स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।