Monday, January 12

चुनाव आयुक्त को कानून से ताउम्र छूट? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जवाब मांगा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को जीवन भर की छूट देने वाले कानून की वैधता पर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) बिल, 2023 के उस प्रावधान को चुनौती देती है, जो चुनाव आयुक्तों को अपने आधिकारिक कामकाज के दौरान किए गए किसी भी कार्य के लिए सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई से आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है।

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चीफ जस्टिस की बेंच का रुख

याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, “हम इस प्रावधान की जांच करना चाहेंगे। नोटिस जारी किया जा रहा है।”
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम इस बात को लेकर गंभीर है कि क्या संसद किसी अधिकारी को ऐसी अभूतपूर्व शक्ति दे सकती है, जो संविधान निर्माताओं ने जजों को भी नहीं दी।

 

याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह कानून मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को ताउम्र किसी भी सिविल या क्रिमिनल मुकदमे से बचाने की शक्ति देता है, जो किसी भी लोकतांत्रिक परंपरा में अप्रत्याशित है।
वकील ने कहा, “संसद ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती जो संविधान निर्माताओं द्वारा अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए निर्धारित अधिकारों से भी ऊपर हो।”

 

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन यह छूट कानूनी जवाबदेही पर सवाल उठा सकती है। कोर्ट इस मामले में केंद्र और चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगेगा और आगे की कार्रवाई तय करेगा।

 

विश्लेषण:
यह मामला चुनाव आयोग के अधिकार और जवाबदेही के बीच संतुलन के सवाल को उठाता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस कानून की वैधता और लोकतंत्र के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

 

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