
मॉस्को/वॉशिंगटन।
अमेरिका ने वेनेजुएला के तट के पास जब्त किए गए रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर के चालक दल में शामिल दो रूसी नागरिकों को रिहा करने का फैसला किया है। रूस ने इस निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि, उसी जहाज पर सवार तीन भारतीय नागरिकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि अमेरिका उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना जता चुका है।
यह टैंकर ‘मैरिनेरा’ (जिसे पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था) उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी तटरक्षक बल द्वारा जब्त किया गया था। अमेरिकी प्रशासन ने इसे प्रतिबंधों के उल्लंघन का मामला बताया है।
टैंकर पर सवार चालक दल की स्थिति
अमेरिकी कार्रवाई के समय इस तेल टैंकर पर विभिन्न देशों के नागरिक सवार थे। इनमें
- दो रूसी नागरिक,
- तीन भारतीय नागरिक,
- 17 यूक्रेनी नागरिक,
- छह जॉर्जियाई नागरिक शामिल बताए गए हैं।
हालांकि अमेरिका ने केवल रूसी नागरिकों की रिहाई की पुष्टि की है। अन्य देशों के नागरिकों, विशेष रूप से भारतीयों को लेकर अभी कोई स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है।
रूस ने जताया संतोष
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बयान जारी कर कहा कि मॉस्को के अनुरोध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैंकर के चालक दल में शामिल दो रूसी नागरिकों को रिहा करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, “हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और अमेरिकी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। अपने नागरिकों की शीघ्र वतन वापसी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”
भारतीय नागरिकों को लेकर बढ़ी चिंता
दूसरी ओर, चालक दल में शामिल तीन भारतीय नागरिकों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। व्हाइट हाउस पहले ही संकेत दे चुका है कि टैंकर के चालक दल के खिलाफ अमेरिकी संघीय अदालत में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इससे भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, बेला-1 टैंकर को वर्ष 2024 में उस समय प्रतिबंधित किया गया था, जब उस पर ईरान समर्थित लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्ला से जुड़ी एक कंपनी के लिए तेल की तस्करी करने का आरोप लगा था। टैंकर जब्त किए जाने के बाद इसका नियंत्रण कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर विवाद
इस मामले को लेकर रूस ने पहले अमेरिका से समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की मांग की थी और अमेरिका की नीति को ‘नव-उपनिवेशवादी’ करार दिया था। रूसी नागरिकों की रिहाई के बावजूद चालक दल के अन्य सदस्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट न होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए सवाल खड़े कर रहा है।