
नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार उन्हें सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने के लिए EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) की मंथली सैलरी लिमिट बढ़ाने की तैयारी में है। वर्तमान में यह लिमिट 15,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 25,000 से 30,000 रुपये किया जा सकता है।
सैलरी लिमिट का मतलब वह बेसिक सैलरी है, जिस पर किसी कर्मचारी के लिए PF में योगदान देना कानूनी रूप से जरूरी होता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है, तो PF कटौती उनकी इच्छा पर निर्भर करती है।
इतिहास और मांग:
सरकार ने पहले भी इस लिमिट को 25,000 रुपये करने पर विचार किया था, लेकिन कंपनियों के विरोध के कारण इसे टाल दिया गया। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि यह लिमिट 30,000 रुपये होनी चाहिए। वर्तमान सैलरी लिमिट लगभग 10 साल पहले, सितंबर 2014 में तय की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने लेबर मिनिस्ट्री से हाल ही में कहा है कि चार महीने के भीतर इस लिमिट की समीक्षा की जाए।
कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा:
सैलरी लिमिट बढ़ने से PF सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़ेगी और असंगठित क्षेत्र के ज्यादा कर्मचारी रिटायरमेंट फंड के दायरे में आ सकेंगे।
अधिक कटौती होने से रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के पास जमा रकम ज्यादा होगी, क्योंकि कंपाउंडिंग का लाभ बढ़ जाएगा।
EPFO ने हाल ही में पैसा निकालने के नियमों में भी ढील दी है, जिससे सब्सक्राइबर के खाते में कम से कम 25% बैलेंस बना रह सके।
इस बदलाव से प्राइवेट कर्मचारियों के लिए लंबे समय में आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और उनकी पेंशन तथा रिटायरमेंट फंड की राशि में इजाफा होगा।