
नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सशस्त्र बल अपनी हवाई सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने में जुटे हैं। इसी क्रम में सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों अपनी ड्रोन-रोधी क्षमताओं को एकीकृत करने के लिए एक विशेष CUAS (काउंटर ड्रोन) ग्रिड विकसित कर रहे हैं। इस ग्रिड के बनने के बाद दुश्मन के हर ड्रोन को हवा में ही नष्ट किया जा सकेगा।
अधिकारियों के मुताबिक यह नया ग्रिड मौजूदा Integrated Air Command and Control System (IACCS) से पूरी तरह अलग तरह से काम करेगा। पारंपरिक हवाई खतरों के साथ-साथ छोटे ड्रोन पर नजर रखने का काम IACCS पर डालने से नेटवर्क पर बोझ पड़ता, लेकिन नया ग्रिड सेना, वायु सेना और नौसेना के संयुक्त हवाई रक्षा केंद्रों (JADCS) से जुड़कर एक डेडिकेटेड ड्रोन-रोधी नेटवर्क के रूप में कार्य करेगा।
यह ग्रिड पिछले 5–6 वर्षों में सेना की तीनों सेवाओं के पास मौजूद ड्रोन-रोधी प्रणालियों को एकीकृत करेगा। इससे वास्तविक समय में निगरानी और कम ऊंचाई वाले मानवरहित हवाई खतरों पर तुरंत प्रतिक्रिया संभव होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना ने तुर्की और चीनी ड्रोन के माध्यम से भारत के नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय एयर डिफेंस यूनिट्स ने नाकाम कर दिया। खासतौर पर L-70 और ZU-23 गन्स ने छोटे ड्रोन को भारी नुकसान पहुँचाया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में डीआरडीओ मुख्यालय के 68वें स्थापना दिवस पर कहा कि डीआरडीओ इस पहल को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि अगले दशक में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को वायु रक्षा प्रणालियों से लैस करना डीआरडीओ की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
इस नई पहल के पूरा होने के बाद भारत का एयर डिफेंस सिस्टम और मजबूत होगा और पाकिस्तान व चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए यह बड़ी चुनौती साबित होगी।