
नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आरक्षण से जुड़े दो अहम फैसले सुनाए हैं, जो सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षित और सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों पर बड़ा असर डालेंगे। इन फैसलों से स्पष्ट हो गया है कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार किसी परीक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं उठाते हुए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे जनरल कैटेगरी में शामिल किया जाएगा।
कर्नाटक केस में झटका
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कर्नाटक से जुड़े मामले में फैसला सुनाया कि अगर किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने प्रतियोगी परीक्षा के किसी भी स्तर पर आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह अनारक्षित (जनरल) वर्ग की सीट का दावा नहीं कर सकता। मामले में याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ लिया था, लेकिन अंतिम मेरिट में बेहतर रैंक होने पर जनरल सीट पर दावा किया। अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
राजस्थान केस में राहत
वहीं, राजस्थान से जुड़े मामले में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे मेरिट लिस्ट में जनरल कैटेगरी में रखा जाएगा। इसके तहत उम्मीदवार इंटरव्यू भी जनरल कैटेगरी के तौर पर देगा। यदि अंतिम मेरिट में जनरल कैटेगरी में नहीं आता, तब भी उसे आरक्षित वर्ग का लाभ लेने का अधिकार रहेगा।
सारांश
आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जनरल में तभी गिना जाएगा, जब उसने किसी परीक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं उठाया हो।
यदि उम्मीदवार ने आरक्षण का लाभ लिया और फाइनल मेरिट में बेहतर प्रदर्शन किया, तो जनरल सीट का दावा नहीं कर सकता।
यह फैसला सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण और मेरिट दोनों पर स्पष्ट दिशा निर्देश देता है।
सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले उम्मीदवारों के अधिकार और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे, साथ ही योग्य आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में शामिल होने का हक़ भी देंगे।