Thursday, January 8

सफलता की मिसाल: नन्हें हाथों से प्लेन छूकर बनीं भारत की पहली महिला राफेल फाइटर पायलट शिवांगी सिंह

 

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देश की पहली और इकलौती महिला राफेल फाइटर पायलट विंग कमांडर शिवांगी सिंह की कहानी साहस, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। बचपन में जब शिवांगी ने पहली बार प्लेन को छुआ, तभी उनके मन में उड़ान भरने का सपना जाग गया। आज वही नन्हीं लड़की भारतीय वायु सेना में राफेल फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बन चुकी हैं।

 

बचपन से ही उड़ान का सपना

 

शिवांगी सिंह का जन्म 15 मार्च 1995 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के पुलवारिया गांव में हुआ। उनके माता-पिता कुमरेश्वर सिंह और सीमा सिंह ने हमेशा उन्हें स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। बचपन में दिल्ली के एयर फोर्स म्यूजियम की विजिट ने शिवांगी के मन में पायलट बनने की इच्छा जगाई।

 

शिक्षा और प्रारंभिक प्रशिक्षण

 

शिवांगी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल और सनबीम स्कूल, वाराणसी से की। वह नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) की 7 यूपी एयर स्क्वाड्रन की सदस्य रही और 2013 में गणतंत्र दिवस परेड में यूपी का प्रतिनिधित्व किया। बाद में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से ग्रेजुएशन पूरी कर उन्होंने एयर फोर्स का एंट्रेंस एग्जाम (AFCAT) क्लियर किया और एयर फोर्स एकेडमी, हैदराबाद में ट्रेनिंग शुरू की।

 

भारत की पहली महिला राफेल पायलट

 

शिवांगी ने अपनी पायलट यात्रा की शुरुआत MiG-21 Bison से की। 2020 में उन्हें पहली बार राफेल फाइटर जेट उड़ाने का मौका मिला। राफेल उड़ाने से पहले उन्होंने थेल्स AESA रडार और स्ट्राइक सिस्टम की प्रशिक्षण ली।

 

मां का समर्थन और प्रेरणा

 

शिवांगी ने AFP को बताया, “मेरी मां मेरे लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत थीं। उन्होंने सिर्फ मुझे पढ़ाना नहीं बल्कि मुझे आजाद बनाना चाहा और मेरे हर कदम पर मेरा समर्थन किया।” उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में सफलता अब असंभव नहीं है।

 

फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर बनीं शिवांगी

 

आज शिवांगी सिंह हॉक एडवांस्ड जेट ट्रेनर फ्लीट में शामिल हैं और नए पायलटों को ट्रेनिंग देंगी। हाल ही में उन्होंने एयरफोर्स स्टेशन तांबरम, तमिलनाडु से फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर का कोर्स पूरा किया। यह सैन्य उड्डयन का सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक माना जाता है।

 

शिवांगी सिंह की सफलता ने युवाओं को यह संदेश दिया है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है।

 

 

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