
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी भर्ती और आरक्षण को लेकर दो अहम फैसले दिए हैं, जो जनरल और आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन फैसलों को समझने के लिए ओपन या जनरल कैटेगरी से जुड़े नियम जानना जरूरी है।
ओपन या जनरल कैटेगरी का कोई कोटा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की सरकारी भर्ती के मामले में कहा कि ओपन या जनरल सीटें सभी के लिए खुली होती हैं। इन्हें किसी जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने स्पष्ट किया कि कोई अभ्यर्थी सिर्फ इसलिए ओपन कैटेगरी की पोस्ट से बाहर नहीं किया जा सकता क्योंकि वह आरक्षित वर्ग से है, यदि उसने जनरल कट-ऑफ क्लियर किया हो।
कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले मेरिट लिस्ट पूरी तरह से तैयार की जानी चाहिए, जिसमें आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार भी शामिल हों जो जनरल कट-ऑफ क्लियर करते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता की गारंटी का पालन है।
ज्यादा नंबर होने पर SC-ST-OBC कब नहीं ले सकते जनरल सीट?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वन सेवा (IFS) के जनरल कैडर के मामले में एससी वर्ग के एक उम्मीदवार के जनरल सीट के दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने आरक्षण के तहत छूट का फायदा लिया है, तो वह जनरल या ओपन कैटेगरी की रिक्तियों के लिए योग्य नहीं माना जाएगा, भले ही उसके अंक जनरल कट-ऑफ से अधिक हों।
IFS मामले में उदाहरण के तौर पर, उम्मीदवार ने 2013 की प्रारंभिक परीक्षा में SC कट-ऑफ का लाभ लिया था। उस साल जनरल कट-ऑफ 267 अंक और SC कट-ऑफ 233 अंक थी। उम्मीदवार ने 247.18 अंक प्राप्त किए थे और SC की छूट का लाभ उठाकर पात्रता हासिल की थी। अब वह जनरल कैडर की मांग कर रहा था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मान्य नहीं किया।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के दो फैसले एक-दूसरे के विरोधाभासी नहीं हैं। आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवार जनरल सीट के लिए हकदार होते हैं, बशर्ते उन्होंने आरक्षण का कोई लाभ न लिया हो। यदि लाभ लिया गया है, तो वह जनरल सीट का दावा नहीं कर सकते।
यह फैसला सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करता है।