
नई दिल्ली: सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने एआई (AI) के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसा सिस्टम पेश किया है, जो खुद से कोडिंग सीख सकता है और बग ढूँढकर सुधार सकता है। Meta के फंडामेंटल AI रिसर्च डिपार्टमेंट ने इस नए AI मॉडल का नाम Self-Play SWE-RL (SSR) रखा है।
SSR सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे GitHub रिपॉजिटरी या इंसानी डेटा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसका मकसद AI को एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तरह स्वतंत्र रूप से काम करने योग्य बनाना है। इस तकनीक से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तेज और अधिक सटीक होगा, और कंपनियां बड़े पैमाने पर सेल्फ-लर्निंग एजेंट्स बना सकेंगी जो बग, टेस्टिंग और डिबगिंग खुद संभालेंगे।
कैसे काम करता है SSR सिस्टम:
SSR में एक ही लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) दो भूमिकाएं निभाता है – एक ‘बग इंजेक्टर’ और दूसरा ‘बग सॉल्वर’। इंजेक्टर की भूमिका में यह जानबूझकर कोड में गलती डालता है, जबकि सॉल्वर की भूमिका में वह उन्हीं गलतियों को ढूँढकर सही कोड तैयार करता है। इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराने से AI नए कोडिंग पैटर्न और समाधान सीखता है।
पूरी ट्रेनिंग ओपन–सोर्स रिपॉजिटरी और Docker सैंडबॉक्स एनवायरनमेंट्स में की गई, ताकि मॉडल सुरक्षित रूप से सीख सके। इस प्रणाली ने पुराने डेटा पर निर्भर AI सिस्टम की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। SWE-Bench Verified और SWE-Bench Pro बेंचमार्क पर SSR ने पुराने रेकॉर्ड तोड़ दिए। Verified टेस्ट में 10.4 अंक और Pro टेस्ट में 7.8 अंक का सुधार हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह सिस्टम व्यावहारिक रूप से सफल होता है, तो भविष्य में प्रोग्रामिंग एजुकेशन और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री दोनों पर इसका गहरा असर होगा। कोड लिखना और सुधारना अब इंसानी काम नहीं, बल्कि AI की बुनियादी क्षमता बन सकता है।