
नई दिल्ली।
बीमा बाजार में एजेंटों को मिलने वाले भारी-भरकम कमिशन पर अब नियमों की कड़ी निगरानी की तैयारी हो रही है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने चेतावनी दी है कि पॉलिसी बेचने का खर्च बढ़ने की वजह से इंश्योरेंस प्रीमियम महंगा हो रहा है। इसी बढ़ते खर्च को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नए नियम बनाए जा सकते हैं, ताकि ग्राहकों को मिस-सेलिंग और अत्यधिक प्रीमियम से बचाया जा सके।
एजेंटों का ज्यादा कमिशन और मिस-सेलिंग
आरबीआई ने भी अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बढ़ते खर्च पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों के अनुसार, पहले साल में एजेंटों को अत्यधिक कमिशन मिलने के कारण गलत जानकारी देकर पॉलिसी बेचना (मिस-सेलिंग) बढ़ता है। ज्यादा पैसे के लालच में एजेंट ग्राहकों को अनावश्यक या गलत पॉलिसी थमा देते हैं, जिससे पॉलिसीधारकों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
60,800 करोड़ का आंकड़ा
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने एजेंटों को कमिशन के तौर पर कुल 60,800 करोड़ रुपये बांटे। यह पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है, जबकि उसी अवधि में कंपनियों की प्रीमियम कमाई सिर्फ 6.73 प्रतिशत बढ़ी। इसका मतलब है कि कंपनियों ने बढ़ी हुई कमाई का बड़ा हिस्सा एजेंटों को कमिशन के रूप में दिया, जिससे पॉलिसीधारकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
आगे की तैयारी
IRDAI और सरकारी एजेंसियां अब इस मसले को गंभीरता से देख रही हैं। नए नियमों के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि ग्राहकों को उचित प्रीमियम पर सही पॉलिसी मिलेगी और मिस-सेलिंग की घटनाओं में कमी आएगी।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी उद्योग विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। निवेश या पॉलिसी खरीदने से पहले उचित परामर्श लेना आवश्यक है।)