
उदयपुर/जयपुर।
धोखाधड़ी के एक मामले में पत्नी के साथ जेल में बंद बॉलीवुड फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट को सोमवार को बड़ा झटका लगा। राजस्थान उच्च न्यायालय ने उदयपुर में उनके और उनके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि यह मामला केवल कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जानबूझकर धन के गबन और बेईमानी के प्रथम दृष्टया प्रमाण मौजूद हैं।
न्यायमूर्ति समीर जैन ने याचिका पर सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में पारदर्शिता की कमी, धन के दुरुपयोग और फर्जी बिलों से जुड़े साक्ष्य सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस जांच में रोक लगाना उचित नहीं होगा।
क्या है मामला
उदयपुर निवासी अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और अन्य सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर ली गई राशि का गलत तरीके से उपयोग किया गया।
याचिकाकर्ता की दलीलें
विक्रम भट्ट की ओर से दलील दी गई कि यह विवाद मूलतः दीवानी प्रकृति का है और दो पक्षों के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन से जुड़ा है, न कि आपराधिक मामला। वकील ने यह भी कहा कि 40 करोड़ रुपये के निवेश से चार फिल्में बनाने का समझौता हुआ था, जिसके तहत बाद में सात करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश भी किया गया। चार में से एक फिल्म पूरी हो चुकी है, लेकिन शिकायतकर्ता ने आगे धन देना रोक दिया।
साथ ही यह तर्क भी रखा गया कि समझौते के अनुसार विवादों के निपटारे का अधिकार क्षेत्र मुंबई होना चाहिए था, न कि उदयपुर।
अदालत का रुख
इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोप केवल समझौते के टूटने तक सीमित नहीं हैं। प्रारंभिक जांच में धन के जानबूझकर गबन, पारदर्शिता की कमी और फर्जी बिलों के संकेत मिले हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि बंबई उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है, तो उच्च न्यायालय को पुलिस जांच में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही विक्रम भट्ट और उनके सहयोगियों को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया गया।