
दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनका एक भावुक संदेश सामने आया है। अदालत ने साफ किया कि दोनों एक साल तक इस मामले में जमानत के लिए फिर से आवेदन नहीं कर सकते। वहीं, पांच अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दे दी गई।
उमर खालिद की करीबी दोस्त और एक्टिविस्ट बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने बताया कि खालिद ने अन्य आरोपियों को जमानत मिलने पर खुशी और राहत जताई, लेकिन खुद कहा कि “जेल अब उनकी जिंदगी बन गई है।” लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खालिद का रिएक्शन साझा किया। उन्होंने लिखा, “मैं उन दूसरों के लिए बहुत खुश हूं जिन्हें जमानत मिली। बहुत राहत मिली।”
जब लाहिड़ी ने खालिद को बताया कि वह अगले दिन उनसे मिलने आएंगी, तो खालिद ने जवाब दिया, “अच्छा, अच्छा, आ जाना। अब यही जिंदगी है।”
आरोप क्या हैं?
दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम और कई अन्य आरोपियों पर भी साजिशकर्ता होने का आरोप है।
दिल्ली दंगों की भयावहता
2020 के दिल्ली दंगों में कई लोगों की जान गई थी और करीब 700 से अधिक लोग घायल हुए। हिंसा की शुरुआत सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी, जहां कई इलाकों में हालात बेकाबू हो गए थे। पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि यह हिंसा कोई अचानक हुई झड़प नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के लिए सुनियोजित और योजनाबद्ध षड्यंत्र था।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है, और उमर खालिद की भावनाओं को उजागर करता है।