
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के लिए 2026 राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साल साबित होने वाला है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पार्टी को मिली करारी हार के बाद तेजस्वी यादव के सामने कई गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
- पारिवारिक द्वंद्व:
राजनीतिक भविष्य पर सबसे बड़ा ग्रहण उनके परिवार के भीतर उठ खड़ा हुआ है। भाई तेज प्रताप यादव का अलग पार्टी बनाना और रोहिणी आचार्य द्वारा लगाए गए आरोप तेजस्वी की साख पर सवाल खड़े करते हैं।
- संगठन मजबूत करना:
तेजस्वी को पार्टी के संगठन को फिर से मजबूत करना होगा ताकि विपक्ष की भूमिका निभाने में सफलता मिल सके। युवा और अनुभवी नेताओं को शामिल कर मजबूत कार्यपालिका बनाना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
- ‘M Y’ समीकरण का बिखराव रोकना:
राजद के लंबे समय तक सत्ता में रहने के लिए सहारा बने ‘M Y’ समीकरण में दरार आ गई है। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम पार्टी ने पांच सीटें जीतकर चुनौती पेश की है, जिससे वोट बिखराव की संभावना बढ़ गई है।
- गठबंधन के भरोसेमंद साथी दल चुनना:
महागठबंधन के साथी दलों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस और VIP में अंतर्विरोध ने तेजस्वी के लिए गठबंधन को कमजोर कर दिया है।
- पार्टी के भीतर विद्रोह कम करना:
हार के बाद कई इलाके में कार्यकर्ताओं का विरोध तेजस्वी के सामने चुनौती बन गया है। टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन पर उठ रहे सवालों को समाधान करना आवश्यक है।
- आगामी चुनाव में टिकट वितरण:
तेजस्वी यादव को पंचायत, प्रखंड और जिले स्तर पर मजबूत कमिटी बनाकर उम्मीदवारों का चयन करना होगा। इससे समाज के निचले स्तर से योग्य और मजबूत प्रत्याशी ऊपरी स्तर तक पहुंच सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन छह प्रमुख चुनौतियों से निपटना तेजस्वी यादव के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगी।