
दो सिपाही सस्पेंड, विभागीय जांच शुरू
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में तैनात दो सिपाहियों पर एक युवक को जबरन थाने ले जाकर बंधक बनाने, मारपीट करने और छोड़ने के एवज में पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर दोनों सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
वसुंधरा सेक्टर-13 निवासी मिथुन राघव ने डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील से शिकायत करते हुए बताया कि 19 दिसंबर को इंदिरापुरम थाने में तैनात सिपाही गौरव और संदीप सादे कपड़ों में उसके घर पहुंचे और बिना किसी नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के उसे जबरन थाने ले गए। आरोप है कि वहां उसे घंटों बंधक बनाकर पीटा गया और छोड़ने के बदले पैसों की मांग की गई।
पीड़ित के अनुसार, उसका अपने चचेरे भाई राहुल से एक लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा है। राहुल की दोनों सिपाहियों से पुरानी पहचान बताई जा रही है। आरोप है कि राहुल के फोन करने पर ही दोनों सिपाहियों ने यह कार्रवाई की।
जीडी में नहीं की गई एंट्री, नियमों का उल्लंघन
डीसीपी के निर्देश पर मामले की जांच एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि सिपाहियों ने न तो मिथुन को थाने लाने की जनरल डायरी (जीडी) में कोई एंट्री की और न ही उसे छोड़ते समय तय प्रक्रिया का पालन किया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए दोनों को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच में पैसे मांगने या लेने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गलत कार्यप्रणाली और नियमों की अनदेखी के आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए गए हैं।
अधिकारियों का बयान
इस संबंध में डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने कहा,
“झगड़े के मामले में किसी भी नागरिक के साथ इस तरह का बर्ताव स्वीकार्य नहीं है। अनुशासनहीनता बरतने पर दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है और विभागीय जांच जारी है।”
लगातार सवालों के घेरे में खाकी
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता वाले कई मामले सामने आए हैं।
16 दिसंबर को शालीमार गार्डन में महिला से कुंडल छीनने के आरोप में दिल्ली पुलिस के सिपाही की गिरफ्तारी हुई थी।
23 दिसंबर को लिंक रोड थाना पुलिस ने दिल्ली साइबर सेल में तैनात सिपाही को चोरी की कार से हादसा करने के मामले में गिरफ्तार किया था।
इन घटनाओं ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।