
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को प्रतिष्ठित मैगजीन ‘द वीक’ ने वर्ष 2025 के लिए ‘मैन ऑफ द ईयर’ सम्मान से नवाजा है। यह सम्मान उन्हें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन AXIOM-4 में उनकी महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका के लिए प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर भारतीय वायुसेना ने उन्हें बधाई देते हुए इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया है।
भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी संदेश में कहा कि यह सम्मान न केवल ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की व्यक्तिगत उत्कृष्टता, साहस और पेशेवर क्षमता का प्रमाण है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती वैश्विक पहचान को भी दर्शाता है। वायुसेना ने उनके समर्पण और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस वर्ष जून में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 18 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर वैज्ञानिक प्रयोगों और अनुसंधान गतिविधियों को अंजाम दिया। यह मिशन इसरो के सहयोग से संचालित किया गया, जिसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र की गईं। मिशन की सफलता के बाद वे 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौटे और अमेरिका में पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करने के बाद 17 अगस्त को भारत पहुंचे।
भारत लौटने पर शुभांशु शुक्ला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें गले लगाकर बधाई दी, जो पूरे देश के लिए एक भावनात्मक और गर्वपूर्ण क्षण था।
AXIOM-4 मिशन को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। इस मिशन ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नया अनुभव दिया और भविष्य के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की तैयारियों को और मजबूती प्रदान की।
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान शुभांशु शुक्ला ने अपने अंतरिक्ष अनुभव साझा करते हुए कहा कि अंतरिक्ष से भारत का दृश्य अत्यंत अद्भुत और प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि उनकी लगभग 20 दिवसीय अंतरिक्ष यात्रा के दौरान किए गए प्रयोग गगनयान मिशन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में उनकी भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति बढ़ती रुचि उत्साहजनक है और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे उनके सपनों को दिशा दें।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह उपलब्धि न केवल भारतीय वायुसेना, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है और भारत के अंतरिक्ष भविष्य को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने वाला कदम साबित होगी।