
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे ने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष चौबीसों घंटे “चुनावी मोड” में रहता है और हर चुनाव से पहले लोगों को रिझाने के लिए अनियोजित लोकलुभावन योजनाओं के तहत धन बांटा जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों के कारण देश और राज्यों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
लोकसभा में वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों (प्रथम बैच) और संबंधित विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रणिती शिंदे ने महाराष्ट्र में आई बाढ़ का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद केंद्र सरकार ने टीम तो भेजी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य को राहत पैकेज मिला है या नहीं। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि पैकेज नहीं मिला, जबकि केंद्र का दावा है कि राज्य सरकार ने प्रस्ताव ही नहीं भेजा। उन्होंने आरोप लगाया कि या तो राज्य सरकार जानबूझकर प्रस्ताव नहीं भेज रही है या फिर केंद्र सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है।
किसानों के साथ ‘मजाक’ है घोषित पैकेज
कांग्रेस सांसद ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं और आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की ओर से प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये सहायता देने की मांग की गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा घोषित पैकेज किसानों के साथ “मजाक” है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में किसानों के खातों में महज 6 रुपये जमा किए गए।
प्रणिती शिंदे ने केवाईसी और आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बताया। उन्होंने कहा कि किसानों को बार-बार केवाईसी करानी पड़ती है और साल में चार बार यह साबित करना पड़ता है कि वे जीवित हैं। उन्होंने इन शर्तों में ढील देने की मांग की।
मुख्यमंत्री राहत कोष के पैसों पर सवाल
शिंदे ने मुख्यमंत्री राहत कोष में हाल ही में जमा हुए 100 करोड़ रुपये का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि उसमें से बहुत कम राशि किसानों तक पहुंची, जबकि “बाकी पैसा कहां गया?” यह स्पष्ट नहीं है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि देश में पैदा होने वाला हर बच्चा जन्म लेते ही करीब सवा लाख रुपये के कर्ज का बोझ ढो रहा है, जो मौजूदा सरकार की नीतियों का नतीजा है।
जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार का आरोप
प्रणिती शिंदे ने महाराष्ट्र में जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से एक समिति ने इस योजना के तहत राज्य के लिए 46 प्रतिशत कटौती का प्रस्ताव दिया है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद प्रतिमा मंडल ने भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को जल जीवन मिशन, मनरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत केंद्र से उचित धनराशि नहीं दी जा रही है।
कुल मिलाकर, लोकसभा की इस बहस में विपक्ष ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों, राहत पैकेजों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए।