Wednesday, May 27

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टेक्सटाइल सेक्टर: करोड़ों भारतीयों की प्रगति की धड़कन, 10 साल में MSP दोगुना, किसानों की आय भी बढ़ी

नई दिल्ली: भारत का टेक्सटाइल सेक्टर सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आजीविका, परंपरा और तकनीकी प्रगति की धड़कन बन चुका है। पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टेक्सटाइल सेक्टर ने नई दिशा, आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान हासिल की है।

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कॉटन किसानों की आमदनी में अभूतपूर्व वृद्धि

टेक्सटाइल वैल्यू-चेन की शुरुआत खेत से होती है। सरकार ने किसानों को बाजार की अनिश्चितता, बिचौलियों के दबाव और दामों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाए। परिणामस्वरूप, 2004-2014 में 173 लाख कॉटन बेल्स की सरकारी खरीद 2014-2024 में 473 लाख बेल्स तक बढ़ गई, यानी लगभग 173% की वृद्धि

कपास का MSP भी दोगुना हुआ है। 2013-14 में MSP ₹3,700 प्रति क्विंटल था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹7,710 हो गया। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक सुरक्षा दोनों मजबूत हुई।

नई तकनीक और उत्पादकता में सुधार

सरकार ने 2,500 करोड़ रुपये का मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी शुरू किया। इससे किसानों को बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक टेक्नॉलजी उपलब्ध कराई जा रही है। फ्लैक्स, रैमी, सिसल और मिल्कवीड जैसे नए फाइबर किसानों को अतिरिक्त आमदनी देने में मदद कर रहे हैं।

इंपोर्ट ड्यूटी में राहत और PLI योजना

कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाने से मिल्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी दामों पर कॉटन उपलब्ध हुआ। PLI योजना ने सेक्टर में नई ऊर्जा भरी है। अब तक 27 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिससे नई फैक्ट्रियां, नई टेक्नॉलजी और लाखों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

नए बाजार और वैश्विक विस्तार

भारत ने 40 नए बाजारों की पहचान की और अब 27 देशों के साथ FTA के जरिए मजबूत व्यापार स्थापित किया है। सिर्फ एक साल में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 111 देशों में बढ़ा, जिनमें 38 देशों में 50% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।

निष्कर्ष: भारत का टेक्सटाइल सेक्टर अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि देश की आर्थिक शक्ति, रोजगार सृजन और वैश्विक नेतृत्व की नींव बन चुका है। यह सेक्टर आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा और दुनिया को Made in India की नई पहचान देगा।

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