Wednesday, July 22

This slideshow requires JavaScript.

CJP आंदोलन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय, विपक्ष से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक बढ़ा समर्थन; क्या सरकार करेगी संवाद?


**नई दिल्ली, 22 जुलाई (सद्वार्ता)।** जंतर-मंतर पर चल रहा **कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)** का आंदोलन अब धीरे-धीरे राष्ट्रीय राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई एक पहल अब विपक्षी दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, क्षेत्रीय आंदोलनों के नेताओं और विभिन्न संगठनों के समर्थन के साथ व्यापक स्वरूप लेती दिखाई दे रही है।

This slideshow requires JavaScript.

आंदोलन के केंद्र में छात्रों, युवाओं और जनहित से जुड़े मुद्दे हैं। जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता **सोनम वांगचुक** अपने आंदोलन को लेकर डटे हुए हैं, वहीं विभिन्न क्षेत्रों से लोग लगातार प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जता रहे हैं।

इसी क्रम में **मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल** भी बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचे और CJP के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। इससे पहले कई सामाजिक संगठनों और जनआंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल हो चुके हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। **कांग्रेस** ने छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। **समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव** भी सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं।

इस बीच सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी तेज है कि यदि आंदोलन का दायरा और बढ़ता है तो देश में जनलोकपाल आंदोलन का नेतृत्व कर चुके समाजसेवी **अन्ना हजारे** भी भविष्य में अपना समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, **अब तक अन्ना हजारे द्वारा इस आंदोलन में शामिल होने या जंतर-मंतर पहुंचने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।**

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन को विभिन्न राज्यों और सामाजिक संगठनों का लगातार समर्थन मिलता रहा, तो यह आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि **क्या केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से औपचारिक बातचीत का रास्ता अपनाएगी, या यह आंदोलन भी लंबे समय तक चलने वाले अन्य जन आंदोलनों की तरह टकराव की स्थिति में पहुंच जाएगा?** आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के रुख पर पूरे देश की नजर रहेगी।

**संपादकीय टिप्पणी:** अन्ना हजारे के आंदोलन में शामिल होने संबंधी दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावना या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, तथ्य के रूप में नहीं।

Leave a Reply