Wednesday, July 22

Politics

बिहार में नई सरकार के चार मंत्री, राजनीति और पद दोनों विरासत में मिली
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बिहार में नई सरकार के चार मंत्री, राजनीति और पद दोनों विरासत में मिली

पटना। बिहार विधानसभा की नई तस्वीर अब साफ़ और स्पष्ट हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नई सरकार में युवाओं के साथ अनुभवी नेताओं को भी स्थान मिला है। इस बार मंत्रिमंडल में कुछ ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिन्हें राजनीति और मंत्री पद दोनों ही विरासत में मिले हैं। चार मंत्रियों की खास विरासत 1. श्रेयसी सिंह जमुई से बीजेपी विधायक श्रेयसी सिंह दूसरी बार लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री बनी हैं। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत दिग्विजय सिंह की बेटी हैं।श्रेयसी सिंह अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज भी रह चुकी हैं और कई पदक जीतकर देश का नाम रौशन कर चुकी हैं। 2020 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अब दूसरी बार बिहार सरकार में मंत्री पद संभाल रही हैं। 2. संतोष कुमार सुमन दूसरा नाम संतोष कुमार सुमन का है। वह केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे हैं। उनके पिता नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2014 मे...
नीतीश कैबिनेट में जातीय संतुलन पर जोर: दो यादव, दो कुशवाहा… किस जाति से मिले कितने मंत्री? पूरी लिस्ट देखें
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नीतीश कैबिनेट में जातीय संतुलन पर जोर: दो यादव, दो कुशवाहा… किस जाति से मिले कितने मंत्री? पूरी लिस्ट देखें

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के दौरान कुल 23 मंत्रियों को शामिल किया गया। नई सरकार में नीतीश कुमार ने जातीय संतुलन और सोशल इंजीनियरिंग को प्राथमिकता देते हुए सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया है। सवर्ण वर्ग: भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ को जगह नीतीश मंत्रिमंडल में सवर्ण जातियों से कई महत्वपूर्ण चेहरे शामिल किए गए हैं: भूमिहार: विजय कुमार सिन्हा (भाजपा) विजय चौधरी (जदयू) राजपूत: लेशी सिंह (जदयू) संजय टाइगर (भाजपा) श्रेयशी सिंह (भाजपा) ब्राह्मण: मंगल पांडेय (भाजपा) कायस्थ: नितिन नवीन (भाजपा) पिछड़ा वर्ग: यादव और कुशवाहा को प्रमुख स्थान एनडीए सरकार में पिछड़े ...
बिना चुनाव लड़े दीपक प्रकाश बने बिहार सरकार में मंत्री, उपेंद्र कुशवाहा की ‘डबल पॉलिटिक्स’ ने किया कमाल
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बिना चुनाव लड़े दीपक प्रकाश बने बिहार सरकार में मंत्री, उपेंद्र कुशवाहा की ‘डबल पॉलिटिक्स’ ने किया कमाल

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल के गठन में एक हैरान करने वाला राजनीतिक मोड़ सामने आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बना दिया गया। यह फैसला न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि इसे उपेंद्र कुशवाहा की दूरगामी रणनीति का परिणाम माना जा रहा है। अंतिम समय में बदला समीकरण सूत्रों के मुताबिक, आरएलएम कोटे से मंत्री पद के लिए पहले कुशवाहा की पत्नी और सासाराम से विधायक स्नेहलता के नाम की चर्चा चल रही थी। लेकिन शपथ ग्रहण से ठीक पहले समीकरण अचानक बदल गया और मंत्री पद दीपक प्रकाश की झोली में डाल दिया गया। उपेंद्र कुशवाहा की दोहरी राजनीतिक डील एनडीए में सीट बंटवारे के दौरान उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी किसी से छिपी नहीं थी। बताया जाता है कि इसी नाराजगी के बीच उनकी केंद्रीय गृह मंत्री ...
**अखिलेश यादव को देखते ही फूट-फूटकर रोए सुधाकर सिंह के बेटे,
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**अखिलेश यादव को देखते ही फूट-फूटकर रोए सुधाकर सिंह के बेटे,

विरोधी दारा सिंह चौहान भी पहुंचे श्रद्धांजलि देने** समाजवादी पार्टी के मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट से विधायक सुधाकर सिंह के निधन ने पूरे राजनीतिक गलियारे को झकझोर दिया है। लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव, वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव और कई दलों के नेता अस्पताल पहुंचे। इनके बीच एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जब सुधाकर सिंह के छोटे बेटे सुजीत, अखिलेश यादव को देखते ही बिलखकर रो पड़े। अखिलेश ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया। विरोधी दारा सिंह चौहान भी पहुंचे, दुख में साथ दिखाई दिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी नेता दारा सिंह चौहान भी मेदांता अस्पताल पहुंचे। घोसी उपचुनाव में सुधाकर सिंह के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रहे दारा सिंह चौहान ने इस दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना दी। यह दृश्य राजनीतिक मर्य...
नौ साल की जेल, मंत्री पद का ऑफर ठुकराया, पेट्रोल पंप लेने से इंकार…
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नौ साल की जेल, मंत्री पद का ऑफर ठुकराया, पेट्रोल पंप लेने से इंकार…

पूर्वांचल के लौह पुरुष सरजू पांडेय की अदम्य कहानी स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही, किसान आंदोलन के प्रखर नेता और ईमानदारी की मिसाल—सरजू पांडेय। आज उनकी 106वीं जयंती पर पूरा गाजीपुर उन्हें नमन कर रहा है। वह एक ऐसे नेता थे जिन्होंने 30 वर्षों के सार्वजनिक जीवन में न खुद के लिए संपत्ति जोड़ी, न ही सत्ता का कोई आकर्षण स्वीकार किया। स्वतंत्रता संग्राम में 42 साल की सजा, 9 साल जेल में बिताए जिला मजिस्ट्रेट के 4 अगस्त 1973 के प्रमाणपत्र के अनुसार, सरजू पांडेय ने साढ़े तीन साल कैद और 15 बेतों की सजा झेली गाजीपुर, बस्ती, वाराणसी और लखनऊ की काल कोठरियों में रहे आज़ादी के बाद भी विभिन्न राजनीतिक मुकदमों में 6 साल और जेल में बिताए कुल मिलाकर उन्होंने 9 साल का कठिन कारावास झेला, लेकिन उनके इरादों और संघर्ष की लौ कभी कमजोर नहीं पड़ी। मंत्री पद और पेट्रोल पंप तक ठुकरा दिया केंद्...
राष्ट्रपति के रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
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राष्ट्रपति के रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

समय-सीमा तय करने वाला निर्णय असंवैधानिक करार, गवर्नर–राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर बड़ा बयान संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने अपने ही पुराने फैसले को पलटते हुए साफ कर दिया कि राष्ट्रपति और राज्यपालों को विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए समय-सीमा निर्धारित करना असंवैधानिक है। चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह संविधान की मूल भावना, शक्तियों के पृथक्करण और संवैधानिक पदों के विवेकाधिकार के खिलाफ है। क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने? 1. समय-सीमा तय करना असंवैधानिक तमिलनाडु मामले में दो जजों की बेंच द्वारा राज्यपाल व राष्ट्रपति के लिए तय की गई समय-सीमा को संविधान पीठ ने गलत बताया। अदालत ने कहा कि न तो राष्ट्रपति और न ही राज्य...
बिहार चुनाव में SIR का दिलचस्प ट्रेंड: 5 में से 4 सीटों पर NDA की जीत, जहां सबसे ज्यादा और सबसे कम नाम डिलीट हुए
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बिहार चुनाव में SIR का दिलचस्प ट्रेंड: 5 में से 4 सीटों पर NDA की जीत, जहां सबसे ज्यादा और सबसे कम नाम डिलीट हुए

नई दिल्ली, ब्यूरो — बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जहां-जहां मतदाता सूची से सबसे ज्यादा और सबसे कम नाम हटाए गए, उन 5 में से 4 सीटों पर एनडीए ने शानदार जीत दर्ज की है। - महिला वोटिंग और SIR—दोनों ने दिखाया अलग ट्रेंड अक्सर माना जा रहा था कि महिलाओं को मिलने वाली डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम का सीधा फायदा एनडीए को मिला, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जहां सबसे ज्यादा महिला वोटिंग हुई, वहां AIMIM ने भी तीन सीटें जीतीं—कोचाधामन, बायसी और अमौर।यह बताता है कि महिला मतदान का प्रभाव सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा। JDU ने ठाकुरगंज सीट जीती, जहां 90% महिलाओं ने मतदान किया, वहीं BJP ने प्राणपुर में जीत दर्ज की, जहां 89% महिला वोटिंग हुई। SIR में सबसे ज्यादा नाम हटे, वहां भी NDA का दबदबा बिहार चुनाव मे...
बिहार में नीतीश कुमार ने 10वीं बार संभाली सत्ता, साथ में 26 नए मंत्रियों ने ली शपथ देखिए—नई कैबिनेट की पूरी सूची
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बिहार में नीतीश कुमार ने 10वीं बार संभाली सत्ता, साथ में 26 नए मंत्रियों ने ली शपथ देखिए—नई कैबिनेट की पूरी सूची

पटना: बिहार की राजनीति में बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा। जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी और हजारों लोगों की भीड़ ने इसे एक बड़ा राजनीतिक आयोजन बना दिया। नीतीश कुमार के साथ कुल 26 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिससे नई सरकार का स्वरूप स्पष्ट हो गया। नीतीश कैबिनेट—इन 26 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ क्रममंत्री का नामपार्टीविधानसभा क्षेत्र1.सम्राट चौधरीभाजपा—2.विजय कुमार सिन्हाभाजपा—3.विजय कुमार चौधरीजेडीयू—4.बिजेन्द्र प्रसाद यादवजेडीयू—5.श्रवण कुमारजेडीयू—6.मंगल पाण्डेयभाजपा—7.डॉ. दिलीप कुमार जायसवालभाजपा—8.अशोक चौधरीजेडीयू—9.लेशी सिंहजेडीयू—10.मदन सहनीजेडीयू—11.नितिन नवीनभाजपा—12.रामकृपाल यादवभाजपा—13.संतोष कुमार सुमनHAM—14.सुनील कुमार...
दानापुर में लालू का ‘किला’ ढहाने वाले भाजपा नेता रामकृपाल यादव बने मंत्री जानिए—कौन हैं बिहार की सियासत के यह ‘राम’
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दानापुर में लालू का ‘किला’ ढहाने वाले भाजपा नेता रामकृपाल यादव बने मंत्री जानिए—कौन हैं बिहार की सियासत के यह ‘राम’

पटना: बिहार में नीतीश कुमार ने बुधवार को 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ कई नए चेहरों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। इन्हीं में एक नाम है भाजपा नेता रामकृपाल यादव का, जिन्होंने इस चुनाव में दानापुर सीट पर RJD प्रत्याशी रीतलाल यादव को 30 हजार से अधिक वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया। लालू यादव के प्रभाव वाले इलाके में भाजपा का परचम लहराने के बाद पार्टी ने उन्हें मंत्री पद देकर सम्मानित किया है। लालू के सबसे करीबी से सियासी प्रतिद्वंदी तक का सफर रामकृपाल यादव का जन्म 12 अक्टूबर 1957 को हुआ था। एक समय था जब वे लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते थे और उन्हें लालू का “छोटा भाई” भी कहा जाता था।लेकिन राजनीति में परिस्थितियां कब बदल जाएं, कहना कठिन है— लालू को सजा होने के बाद RJD ने रामकृपाल को टिकट नहीं दिया उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और पाटलिपुत्र सीट ...
IAS सुधांश पंत और सीएम भजनलाल के बीच बढ़ते तनाव ने बढ़ाई हलचल, केंद्र ने बीच कार्यकाल में वापस बुलाया राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
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IAS सुधांश पंत और सीएम भजनलाल के बीच बढ़ते तनाव ने बढ़ाई हलचल, केंद्र ने बीच कार्यकाल में वापस बुलाया राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल

जयपुर: राजस्थान की प्रशासनिक हलचल के बीच मुख्य सचिव IAS सुधांश पंत का अचानक दिल्ली ट्रांसफर होना राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। 10 नवंबर की देर रात जारी आदेश में केंद्र ने पंत को वापस बुलाते हुए उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव पद की जिम्मेदारी सौंप दी। यह बदलाव ठीक उस समय हुआ, जब उनके रिटायरमेंट में अभी दो साल से अधिक का समय बचा हुआ है। तनाव बना ट्रांसफर की मुख्य वजह? सूत्रों का कहना है कि बीते कुछ महीनों में आईएएस सुधांश पंत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच दूरियां बढ़ती जा रही थीं। कई महत्त्वपूर्ण फाइलों के निस्तारण और प्रशासनिक निर्णयों में मतभेद सामने आए। विपक्ष भी बार-बार आरोप लगा रहा था कि प्रदेश में फैसले मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि मुख्य सचिव ले रहे हैं। भाजपा संगठन के भीतर भी “ब्यूरोक्रेसी के बढ़ते प्रभाव” को लेकर नार...