Sunday, May 24

Blog

भोपाल: संसदीय समिति ने मध्य प्रदेश में एससी-एसटी अफसरों की गिनती पर उठाए सवाल, डीजीपी चुप रहे
Breaking

भोपाल: संसदीय समिति ने मध्य प्रदेश में एससी-एसटी अफसरों की गिनती पर उठाए सवाल, डीजीपी चुप रहे

भोपाल: गुरुवार को अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए गठित केंद्रीय संसदीय समिति की बैठक भोपाल में आयोजित हुई। इस दौरान समिति के सदस्यों ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से एससी-एसटी वर्ग के अफसरों की संख्या, उनके पद और नियुक्तियों को लेकर कई सवाल किए। लेकिन मध्य प्रदेश के डीजीपी इन सवालों के संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे। 🔹 डीजीपी के जवाब पर चुप्पी संसदीय समिति ने डीजीपी से पूछा कि मध्य प्रदेश में कितने एससी-एसटी अधिकारी हैं। इस पर डीजीपी ने कोई आंकड़ा नहीं बता पाए और स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पर समिति के सदस्य असंतुष्ट रहे। 🔹 कलेक्टर और एसपी की संख्या मीटिंग में यह भी सवाल उठाया गया कि कलेक्टर और एसपी में आरक्षित वर्ग से कितने पदाधिकारी हैं और कितनी महिलाएं हैं। इस पर एसीएस अशोक वर्णवाल ने बताया कि राज्य में 11 कलेक्टर एससी वर्ग से और 6 एसटी वर्ग से हैं। इसके अलावा दो-तीन कमि...
कर्नाटक: गन्ना किसानों का आंदोलन गरमाया, सीएम सिद्धारमैया ने पीएम मोदी से मुलाकात का समय मांगा
Karnataka

कर्नाटक: गन्ना किसानों का आंदोलन गरमाया, सीएम सिद्धारमैया ने पीएम मोदी से मुलाकात का समय मांगा

बेंगलुरु: कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन लगातार तीव्र होता जा रहा है। उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, विजयनगर, बीदर, गड़ग, हुबली-धारवाड़ और हावेरी जिलों में किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं। इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों के आंदोलन पर चर्चा के लिए तत्काल मुलाकात का समय मांगा है। 🔹 किसानों ने जताया गुस्सा बुधवार को बेलगावी में नाराज किसानों ने राज्य मंत्री शिवानंद पाटिल की कार पर चप्पलें फेंकीं, जब वे गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसानों से बातचीत कर रहे थे। मंत्री ने कहा कि गन्ने की कीमत तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है, बल्कि यह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। 🔹 सीएम और चीनी मिल मालिकों की बैठक मंत्री शिवानंद पाटिल ने बताया कि सीएम सिद्धारमैया शुक्रवा...
लखनऊ: आजम खान ने मुलाकात के बाद कही यह बड़ी बात, कहा – मेरे परिवार के साथ अन्याय हुआ
Politics, Uttar Pradesh

लखनऊ: आजम खान ने मुलाकात के बाद कही यह बड़ी बात, कहा – मेरे परिवार के साथ अन्याय हुआ

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान आज सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात करने उनके लखनऊ स्थित आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग 30 मिनट तक बातचीत हुई। इस मुलाकात को सपा के भीतर राजनीतिक हलचल और भविष्य की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 🔹 आजम खान का बयान मुलाकात के बाद आजम खान ने पत्रकारों से कोई विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल यह कहा कि: “मेरे परिवार के साथ बहुत अन्याय हुआ है।” “मैं अपना दर्द और अनुभव साझा करने आया था।” आजम की यह प्रतिक्रिया उन चर्चाओं के बीच आई है, जिसमें उनके राजनीतिक कदम और पार्टी में संभावित बदलाव को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। 🔹 पिछली मुलाकात और नेताओं से बैठक कुछ दिन पहले अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे थे और आजम खान से मुलाकात की थी। इसके अलावा गुरुवार को आजम खान ने कई नेताओं से भी मुलाकात की।...
यूपी में EV खरीदारों के लिए बड़ी राहत, योगी सरकार ने रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दो साल बढ़ाई
Uttar Pradesh

यूपी में EV खरीदारों के लिए बड़ी राहत, योगी सरकार ने रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दो साल बढ़ाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने वाले ग्राहकों को सरकार की तरफ से बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट को दो साल और बढ़ा कर अक्टूबर 2027 तक कर दिया गया है। इस निर्णय से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को काफी आर्थिक राहत मिलेगी और राज्य में स्वच्छ परिवहन प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। 🔹 सरकार का उद्देश्य परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह कदम मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीजल) से होने वाले प्रदूषण को कम करने और स्थायी, स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में पारंपरिक ईंधन की उपलब्धता कम होती जाएगी, इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य के परिवहन का आधार बनेंगे। 🔹 नीति और संशोधन उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2022 में इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं ग...
सीकर: दांता रामगढ़ में गोचर भूमि पर अवैध कब्जा, हाईकोर्ट ने एसडीएम और तहसीलदार पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए
Rajasthan

सीकर: दांता रामगढ़ में गोचर भूमि पर अवैध कब्जा, हाईकोर्ट ने एसडीएम और तहसीलदार पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए

सीकर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दांता रामगढ़ तहसील में गोचर भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गोचर भूमि पर अवैध कब्जा करवाना गंभीर लापरवाही है और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ नियम 16 के तहत दंडात्मक कदम उठाए जाएं। 🔹 मामले का विवरण मामला त्रिलोकीपुरा ग्राम पंचायत की बहुमूल्य गोचर भूमि से जुड़ा है। करीब 25 वर्ष पूर्व, यह भूमि कोलकाता की एक निजी संस्था को जिला प्रशासन द्वारा आवंटित की गई थी। ग्रामीणों ने लगातार इसका विरोध किया और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि भूमि पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाए। लेकिन इसके बावजूद, लगभग दो माह पहले एसडीएम और तहसीलदार पुलिस बल के साथ भूमि पर पहुंचकर अवैध कब्जा करा चुके थे। 🔹 हाईकोर्ट में सुनवाई और आदेश ग्रामीणों की ओर से व...
लंबे रिश्तों में क्यों कम हो जाती है यौन इच्छा?
Life Style

लंबे रिश्तों में क्यों कम हो जाती है यौन इच्छा?

मनोवैज्ञानिक कारण और रिश्ते को फिर से जीवंत करने के उपाय लंबे समय से साथ रह रहे दंपतियों में यौन इच्छा (Sexual Desire) का धीरे-धीरे कम होना एक सामान्य घटना है। इसे अक्सर लोग “प्यार खत्म हो जाना” मान लेते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह वास्तव में एक स्वाभाविक हार्मोनल और भावनात्मक परिवर्तन है। रिश्ते की शुरुआत में शरीर में डोपामिन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन तेजी से सक्रिय होते हैं — जो आकर्षण, उत्तेजना और जुनून पैदा करते हैं। परंतु जैसे-जैसे रिश्ता गहराता है, शरीर में ऑक्सिटोसिन नामक “बॉन्डिंग हार्मोन” बढ़ने लगता है। यह भावनात्मक नज़दीकी को तो मज़बूत करता है, लेकिन समय के साथ यौन आकर्षण की तीव्रता को कम भी कर देता है।सीधे शब्दों में कहें तो — प्यार गहराता है, पर वासना स्थिर हो जाती है। क्या इसका असर महिलाओं पर ज़्यादा होता है? अध्ययनों से पता चलता है कि यह बदलाव मह...
क्या अब “अलग सोना” ही रिश्तों को बचाने का नया तरीका है?शहरी कपल्स के बीच बढ़ रहा है ‘स्लीप डिवोर्स’ का चलन — मानसिक स्वास्थ्य का नया उपाय बनकर उभर रहा यह ट्रेंड
Life Style

क्या अब “अलग सोना” ही रिश्तों को बचाने का नया तरीका है?शहरी कपल्स के बीच बढ़ रहा है ‘स्लीप डिवोर्स’ का चलन — मानसिक स्वास्थ्य का नया उपाय बनकर उभर रहा यह ट्रेंड

तेज़ रफ्तार शहरी जीवनशैली, लंबी वर्किंग आवर्स, डिजिटल डिस्टर्बेंस और अनियमित दिनचर्या के बीच अब कपल्स अपने रिश्तों और मानसिक शांति दोनों को संभालने के नए तरीके खोज रहे हैं। इन्हीं में से एक उभरता ट्रेंड है — “स्लीप डिवोर्स”, यानी पति-पत्नी का अलग-अलग बिस्तर या कमरे में सोना। सुनने में यह रिश्ता टूटने जैसा लगता है, पर असल में यह कदम रिश्ते को और मज़बूत बना रहा है। क्या है ‘स्लीप डिवोर्स’? “स्लीप डिवोर्स” का मतलब वैवाहिक दूरी नहीं, बल्कि बेहतर नींद के लिए लिया गया एक व्यावहारिक निर्णय है। यह प्रचलन अक्सर खर्राटे, अलग-अलग नींद के टाइम, या नाइट-शिफ्ट जैसे कारणों से शुरू होता है, लेकिन इसके फायदे इससे कहीं अधिक गहरे हैं। अच्छी नींद से चिड़चिड़ापन घटता है, भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है और तनाव कम होता है — जिससे कपल्स का संवाद और रिश्ते दोनों सुधरते हैं। पर्याप्त नींद लेने वाले लोग अधि...
क्या हरियाणा में कांग्रेस वाकई “वोट चोरी” से हारी थी? मैदान में जो दिखा, उसने सच्चाई उजागर कर दी
Haryana, Opinion, Politics

क्या हरियाणा में कांग्रेस वाकई “वोट चोरी” से हारी थी? मैदान में जो दिखा, उसने सच्चाई उजागर कर दी

हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणामों को एक साल बीत चुका है, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में अपनी तथाकथित “H-फाइल्स” जारी कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हर आठवां मतदाता फर्जी है और बड़े पैमाने पर “वोट चोरी” हुई है। लेकिन उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। राहुल गांधी यह सवाल उठाते हैं कि जब कांग्रेस को अपनी जीत का पूरा भरोसा था, तो भाजपा को बहुमत कैसे मिल गया। मगर भाजपा या चुनाव आयोग पर उंगली उठाने से पहले उन्हें यह बताना होगा कि कांग्रेस को हरियाणा विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त करने में पूरा एक साल क्यों लग गया? और आखिर पार्टी अब भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा परिवार से आगे नई नेतृत्व पंक्ति क्यों नहीं बना पाई? असल समस्या शायद मतदाता सूची में नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदर ही छिपी है। कांग्रेस का अंदरूनी पतन हमारी जमीन...
महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव 2025: लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का समय
Maharashtra, Opinion

महाराष्ट्र नगरीय निकाय चुनाव 2025: लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का समय

लेखक: विनायक अशोक लुनिया भारत का लोकतंत्र केवल संसद या विधानसभा तक सीमित नहीं है। इसकी असली ताकत और आत्मा उन संस्थाओं में बसती है जो जनता के सबसे नज़दीक हैं — ग्राम पंचायतें, नगर परिषदें और नगर पंचायतें**।हाल ही में **महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित नगर निकाय चुनावों की अधिसूचना इस लोकतांत्रिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। आने वाली 2 दिसंबर 2025 को राज्य के लगभग 300 नगरीय निकाय फिर से जनता की अदालत में जाएंगे — विश्वास का नया जनादेश पाने के लिए। 🔹 स्थानीय शासन — लोकतंत्र का असली चेहरा स्थानीय निकाय चुनावों में लोकतंत्र अपनी सबसे नज़दीकी अभिव्यक्ति पाता है।जहाँ सांसद और विधायक नीतियाँ बनाते हैं, वहीं नगरसेवक और पार्षद उन्हें धरातल पर अमल में लाते हैं**।सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ इन्हीं के निर्णयों पर निर्भर करती हैं। इसलिए,...
पदक और मैचों से आगे — भारत को खेल को “विकास का आधार” मानना होगा, “मनोरंजन” नहीं
Opinion, Sports

पदक और मैचों से आगे — भारत को खेल को “विकास का आधार” मानना होगा, “मनोरंजन” नहीं

दशकों से भारत में खेलों को एक वैकल्पिक क्षेत्र के रूप में देखा गया है — जिसे चाहो तो अपनाओ, वरना जीवन में जरूरी नहीं। लेकिन आज खेल केवल मैदानों तक सीमित नहीं हैं। ये स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक एकता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से सीधे जुड़े हैं।खेलों को राष्ट्रीय विकास के स्तंभ के रूप में मान्यता देना अब केवल खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य हो गया है।अब समय है कि नीति, शासन और समाज मिलकर इस दृष्टिकोण को संस्थागत रूप दें। 🔹 मनोरंजन से राष्ट्र निर्माण तक भारत जैसे विशाल और युवा देश में खेलों को केवल मनोरंजन का साधन नहीं माना जा सकता। खेल अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और धैर्य सिखाते हैं — जो एक मजबूत समाज की नींव हैं।फिर भी, भारत में खेलों को अब भी “ऐच्छिक” समझा जाता है। राष्ट्रीय बजट में इसका हिस्सा नगण्य है, शिक्षा में इसका स्थान सीम...