
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मतदाताओं को एक भावुक पत्र लिखा, जिसकी शुरुआत उन्होंने “जय मां काली” के शब्दों से की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बीजेपी की नई रणनीति का हिस्सा है, जो बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक माहौल के साथ पार्टी को करीब लाने की कोशिश को दर्शाती है।
पत्र में उठाए गए मुख्य मुद्दे
पीएम मोदी ने पत्र में बंगाल में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने यह भी दोहराया कि महिलाओं की सुरक्षा बीजेपी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जय श्री राम से जय मां काली की ओर बदलाव
बीजेपी की पश्चिम बंगाल में अब तक की अभियान रणनीति में “जय श्री राम” का नारा मुख्य रहा है। लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अब “जय मां काली” और “जय मां दुर्गा” का इस्तेमाल पार्टी की कोशिश को दिखाता है कि वह बंगाल के सांस्कृतिक माहौल के साथ और अधिक जुड़ना चाहती है।
पीएम मोदी के इस भावुक नोट के पहले ही पार्टी की महिला मोर्चा की नेता रेखा गुप्ता ने कोलकाता में अपने भाषण की शुरुआत मां दुर्गा की शक्ति का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने महिला समर्थकों से कहा कि अपनी इज्जत और सुरक्षा के लिए दुर्गा की शक्ति को अपने अंदर जगाना जरूरी है। उन्होंने आरजी कर हॉस्पिटल और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज में हुए रेप-मर्डर के मामलों का भी जिक्र किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में 2011 से टीएमसी सत्ता में है। 20 मई, 2011 को ममता बनर्जी राज्य की मुख्यमंत्री बनी थीं। बीजेपी इस बार 2026 के चुनावों में टीएमसी से सत्ता छीनने की तैयारी में है। पीएम मोदी का “जय मां काली” नोट और पार्टी के नेताओं द्वारा मां दुर्गा और मां तारा का जिक्र चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
