Monday, February 23

‘रामभद्राचार्य को जेल भेजना चाहिए था… 420 का केस वापस लेना मेरी गलती’, अखिलेश यादव का बड़ा बयान

लखनऊ, 23 फरवरी 2026: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने रविवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान तीखा राजनीतिक बयान देकर सियासी माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पर निशाना साधने के साथ-साथ जगद्गुरु Jagadguru Rambhadracharya को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया।

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अखिलेश यादव ने कहा, “मुझसे गलती हुई। रामभद्राचार्य पर 420 का मुकदमा था, जिसे हमने वापस लिया था। मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सपा प्रमुख

सपा अध्यक्ष ने Swami Avimukteshwaranand Saraswati के समर्थन में बोलते हुए कहा कि प्रयागराज में शंकराचार्य कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे, वह भी कड़ाके की ठंड में।

उन्होंने कहा, “हमारी सनातन परंपरा में किसी संत को स्नान से रोके जाने की कल्पना नहीं की जा सकती। यह पहली बार हुआ है कि किसी संत को स्नान से रोका गया। अब सरकार उन्हें अपमानित करने के लिए 20 साल पुरानी घटना सामने ला रही है।”

420 का मुकदमा वापस लेने पर जताया अफसोस

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल में रामभद्राचार्य पर दर्ज 420 का मुकदमा वापस लिया गया था, जिसे अब वे अपनी राजनीतिक भूल मानते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि शिकायतकर्ता उनका शिष्य है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन “इतने घटिया आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में संत समाज और राजनीति के बीच टकराव को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

डिप्टी सीएम पर भी साधा निशाना

उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak द्वारा बटुकों को सम्मानित किए जाने के मुद्दे पर भी सपा प्रमुख ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जब शिखा पकड़कर अपमानित किया जा रहा था, तब भाजपा के लोग कहां थे?”

PDA आंदोलन का जिक्र

अखिलेश यादव ने कहा कि जैसे-जैसे आम जनता की पीड़ा बढ़ रही है, वैसे-वैसे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) आंदोलन मजबूत हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी दलित, पीड़ित और शोषित वर्गों के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके सम्मान व अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जहां सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है।

प्रदेश की राजनीति में इस बयान के बाद नई बहस छिड़ गई है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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