Friday, February 13

नकली 4K टीवी से बचें! केवल रेज़ॉल्यूशन देखना पड़ सकता है महंगा

नई दिल्ली: स्मार्ट टीवी खरीदते समय केवल डिस्प्ले रेज़ॉल्यूशन पर ध्यान देना एक बड़ी भूल हो सकती है। ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में आजकल 20,000 रुपये से कम में 4K टीवी मिल रहे हैं, लेकिन इनमें अक्सर ‘नकली 4K’ होने का खतरा रहता है। फीचर्स और ऑफर्स के चकाचौंध में ग्राहक सही निर्णय नहीं ले पाते और असली 4K अनुभव से वंचित रह जाते हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, 4K का मतलब केवल पिक्सल काउंट नहीं होता। असली 4K टीवी में रिफ्रेश रेट और MEMC (मोशन एस्टिमेशन, मोशन कंपेंसेशन) जैसी तकनीकें भी शामिल होती हैं, जो विज़ुअल्स को स्मूद और ज्वलंत बनाती हैं।

सस्ते 4K टीवी में क्या दिक्कतें आती हैं?

सस्ते टीवी में पिक्सल उच्च होने के बावजूद कलर्स फीके और मूवमेंट धुंधली लग सकती है। दौड़ते हुए सीन या खेल के लाइव एक्शन में फ्रेम जर्क जैसा अनुभव हो सकता है। केवल रेज़ॉल्यूशन देखकर खरीदी गई टीवी गेमिंग और फिल्मों में असली मज़ा नहीं देती।

MEMC तकनीक क्या करती है?

MEMC तकनीक दो असली फ्रेम के बीच एक आर्टिफ़िशियल फ्रेम जोड़ देती है, जिससे मूवमेंट स्मूद लगता है। इसका फायदा तब होता है जब आप तेज़ एक्शन सीन, खेल या चलती वस्तुएँ देख रहे हों। इसे आसान भाषा में मोशन स्मूदनेस कहते हैं।

रिफ्रेश रेट पर ध्यान दें

विशेषज्ञों का कहना है कि असली 4K अनुभव के लिए कम से कम 120 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट वाली टीवी खरीदें। इससे MEMC की जरूरत कम होती है, गेमिंग अनुभव बेहतर होता है और नई फिल्मों का मज़ा दोगुना हो जाता है।

निष्कर्ष: अगर आप सच में 4K टीवी का पूरा अनुभव चाहते हैं तो सिर्फ रेज़ॉल्यूशन देखकर निर्णय न लें। रिफ्रेश रेट और डिस्प्ले तकनीकें देखें और समझदारी से निवेश करें।

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