Friday, February 13

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने काफी कुछ दे दिया, अब भारत को सही रणनीति अपनानी होगी

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच नया द्विपक्षीय व्यापार समझौता आर्थिक दृष्टि से गेम चेंजर साबित हो सकता है। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, इस डील के बाद भारत का अमेरिका के साथ सालाना ट्रेड सरप्लस 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि निर्यात क्षमता 100 अरब डॉलर सालाना को पार कर सकती है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 18 प्रतिशत तक घट गया है। इसका मतलब है कि भारत अमेरिकी बाजार में सबसे प्रतिस्पर्धी एशियाई निर्यातकों में शामिल हो गया है। यह टैरिफ वियतनाम और कई प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं से भी कम है, जिससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हुआ है।

निर्यात में बड़े अवसर

एसबीआई रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ टॉप 15 प्रोडक्ट कैटेगरी में निर्यात बढ़ाकर सालाना लगभग 97 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें बिजली मशीनरी, परमाणु रिएक्टर और यांत्रिक उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, वाहन, रत्न और आभूषण प्रमुख योगदानकर्ता होंगे।

कृषि क्षेत्र भी इस समझौते से लाभान्वित होगा। भारत के लगभग 75 प्रतिशत कृषि निर्यात पर अमेरिका में अब जीरो अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। इसमें चावल, मसाले, चाय, कॉफी, तिलहन, मेवे और समुद्री भोजन शामिल हैं। इससे किसानों और मछुआरों को सीधे लाभ मिलने की संभावना है।

आयात और चीन+1 अवसर

आयात पक्ष पर भारत ने अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ को घटाने या खत्म करने पर सहमति दी है। अगले पांच सालों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के उत्पादों को आयात करने की योजना है, जिससे भारत की घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों के निवेश के लिए अवसर खुलेंगे।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, यह समझौता चीन+1 सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन के रास्ते भी खोलता है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में। भारत इस डील के जरिए वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।

भारत के लिए रणनीतिक लाभ

कुल मिलाकर यह व्यापार सौदा भारत को मजबूत रणनीतिक और आर्थिक स्थिति में रखता है। संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों से समझौता किए बिना निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार, निर्यात को बढ़ावा, बाहरी संतुलन को मज़बूती और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को गहरा करने का अवसर देता है।

एसबीआई रिसर्च का निष्कर्ष है कि अब सबकुछ भारत पर निर्भर करता है कि वह इस अवसर को सही रणनीति और स्मार्ट नीति के साथ कैसे भुनाता है।

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