
नई दिल्ली।
कोविड-19 महामारी को बीते छह वर्ष से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव आज भी कई लोगों की सेहत पर असर डाल रहे हैं। खासतौर पर बड़ी संख्या में लोग संक्रमण से ठीक होने के बाद भी सांस फूलने, सीने में जकड़न, खांसी और जल्दी थकान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सवाल यह है कि जब संक्रमण खत्म हो चुका है, तो फिर सांस लेने में तकलीफ क्यों बनी रहती है?
आईएसआईसी मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राज कुमार के अनुसार, फ्लू, निमोनिया और कोविड-19 जैसे श्वसन संक्रमणों के बाद कुछ लोगों में पोस्ट इंफेक्शन लंग प्रॉब्लम देखी जाती है, जो भारत में तेजी से आम होती जा रही है।
पोस्ट वायरल ब्रोंकियल हाइपररिस्पॉन्सिवनेस है बड़ी वजह
डॉ. राज कुमार बताते हैं कि कोविड के बाद सांस फूलने का एक प्रमुख कारण पोस्ट वायरल ब्रोंकियल हाइपररिस्पॉन्सिवनेस (PVBHR) है। इस स्थिति में संक्रमण ठीक होने के बाद भी फेफड़ों की नलियां अत्यधिक संवेदनशील बनी रहती हैं। इसके चलते मरीजों में खांसी, घरघराहट, सीने में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि ये लक्षण अस्थमा जैसे होते हैं, लेकिन यह अस्थमा नहीं होता।
3 हफ्ते से 3 महीने में हो सकता है सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों में यह समस्या अस्थायी होती है और संक्रमण के 3 हफ्ते से लेकर 3 महीने के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि, इस दौरान मरीजों को रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है।
कुछ मामलों में फेफड़ों को स्थायी नुकसान
डॉ. राज कुमार ने बताया कि गंभीर कोविड या निमोनिया के बाद कुछ लोगों के फेफड़ों में सूजन के कारण स्थायी क्षति हो सकती है, जिसे पल्मोनरी फाइब्रोसिस कहा जाता है। इस स्थिति में फेफड़ों के टिश्यू सख्त हो जाते हैं, जिससे ऑक्सीजन का आदान-प्रदान मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा कुछ मरीजों में ‘लॉन्ग कोविड’ के रूप में भी सांस फूलने की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
इन लोगों को ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, संक्रमण के बाद फेफड़ों को स्थायी नुकसान का खतरा इन लोगों में अधिक रहता है—
- जिन्हें कोविड के दौरान अस्पताल में भर्ती होना पड़ा हो
- जिन्हें ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी हो
- बुजुर्ग व्यक्ति
- अस्थमा, डायबिटीज या सीओपीडी के मरीज
- लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोग
जांच और इलाज को न करें नजरअंदाज
अगर संक्रमण के बाद सांस फूलने की समस्या बनी हुई है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। पल्मोनोलॉजिस्ट की सलाह लेकर स्पाइरोमेट्री, एक्स-रे या सीटी स्कैन जैसी जांच कराई जा सकती है। समय पर इलाज, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, नियमित व्यायाम और जरूरत पड़ने पर इनहेलर जैसी दवाओं से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्षतः, कोविड-19 से उबरने के बाद भी सांस फूलना एक आम लेकिन गंभीर संकेत हो सकता है। समय रहते जांच और सही उपचार से फेफड़ों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।