
नागौर/जोधपुर: मारवाड़ के रसूखदार मिर्धा परिवार की साख अब विवादों की आग में झुलस रही है। जोधपुर के ‘मिर्धा फार्म’ स्थित महज 150 वर्ग गज की जमीन को लेकर भाई मनीष और बहन ज्योति मिर्धा आमने-सामने हैं। मनीष इसे ‘बेटे का फर्ज’ बता रहे हैं, जबकि विदेश से ज्योति इसे जमीन कब्जाने की सुनियोजित साजिश करार दे रही हैं।
मनीष का भावुक दांव
15 जनवरी की रात मनीष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे अपने दिवंगत पिता भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि उसी पैतृक स्थल पर बनवाना चाहते हैं, जहां उनके दादा नाथूराम मिर्धा और बड़े भाई की समाधियां पहले से मौजूद हैं। मनीष का दावा है कि 2004 के बंटवारे में तय हुआ था कि यह जमीन ‘सांझा’ रहेगी। उनका आरोप है कि ज्योति इस बेशकीमती जमीन को बेचने की योजना में हैं और समाधियां इस सौदे में बाधक हैं।
ज्योति का पलटवार
विदेश में रहने वाली ज्योति ने मनीष के दावों को खारिज करते हुए इसे जमीन पर कब्जे की कोशिश बताया। उनका कहना है कि मनीष ने पिता का अंतिम संस्कार अपने हिस्से की जमीन में किया था, तो अब समाधि क्यों उनकी निजी जमीन पर बनाना चाहते हैं? उन्होंने तंज कसा, “हिंदू संस्कारों में अंतिम संस्कार वहीं होता है, समाधि भी वहीं बनती है, मनीष जी। क्या कल आपकी इच्छा राजघाट पर समाधि बनाने की होगी?”
FIR और गुंडागर्दी के आरोप
झगड़ा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा। ज्योति के केयरटेकर ने प्रतापनगर थाने में FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि मनीष ने 10-12 लोगों के साथ फार्महाउस में घुसकर चौकीदार को धमकाया और तोड़फोड़ की। मनीष इसे पिता के प्रति ‘फर्ज’ बता रहे हैं, जबकि ज्योति इसे कानून और मालिकाना हक का उल्लंघन मान रही हैं।
150 गज की यह जमीन अब मारवाड़ के प्रतिष्ठित मिर्धा परिवार की साख और परिवारिक रिश्तों की परीक्षा पर खड़ी हो गई है।