Thursday, May 14

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वाराणसी में इटली के कपल ने रचाई हिंदू रीति से शादी — क्रिश्चियन होकर भी सनातन परंपराओं में जताया अटूट विश्वास, बोले– अब आत्मिक सुकून मिल रहा है

वाराणसी। भारत की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में मंगलवार को एक अनोखा विवाह समारोह देखने को मिला। इटली से आए प्रेमी युगल अंतोलिया और ग्लोरिस ने शिवाला स्थित नव दुर्गा मंदिर में पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लेकर एक-दूसरे के साथ जीवनभर का बंधन बांधा। क्रिश्चियन होने के बावजूद दोनों ने सनातन परंपराओं के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की।

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🇮🇹 इटली से वाराणसी तक का आध्यात्मिक सफर

तीन दिन पहले वाराणसी पहुंचे यह जोड़ा मूल रूप से इटली का निवासी है और वहां के एक चर्च में क्रिश्चियन तरीके से विवाह कर चुका था। हालांकि, भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और हिंदू विवाह की “सप्तपदी परंपरा” में विश्वास रखते हुए दोनों ने तय किया कि वे एक बार फिर विवाह करेंगे — इस बार भारतीय संस्कृति के अनुरूप, मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के साथ।

🔔 शिवाला के नव दुर्गा मंदिर में हुआ विवाह संस्कार

मंगलवार को शुभ मुहूर्त में विवाह समारोह संपन्न हुआ। विवाह कराने वाले पुरोहित विकास पांडे ने बताया कि दंपति की इच्छा थी कि विवाह पूर्ण वैदिक पद्धति से हो। इसलिए कश्यप गोत्र मानकर दोनों का विवाह कराया गया। करीब दो घंटे तक चले इस पवित्र समारोह में वैदिक मंत्रों की गूंज और पूजा-अर्चना के बीच दोनों ने सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का वचन दिया।

चूंकि दुल्हन के परिवार का कोई सदस्य विवाह में शामिल नहीं हो सका, इसलिए अंतोलिया के मुंहबोले भाई ने उनका कन्यादान किया। यह क्षण उपस्थित लोगों के लिए भावुकता से भरा हुआ था।

🕉️ ‘हिंदू परंपराओं में मिली आत्मिक शांति’

विवाह के बाद दुल्हन ग्लोरिस ने कहा,

“हमने हिंदू रीति से विवाह इसलिए किया क्योंकि इसमें आत्मा के सात जन्मों का संबंध बताया गया है। हमें लगता है कि यह सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि आत्मिक एकता का बंधन है। हिंदू संस्कारों से शादी करके हमें मन की शांति और सुकून मिला है।”

दूल्हे अंतोलिया ने भी कहा कि भारत की परंपराएं और आध्यात्मिकता उन्हें हमेशा आकर्षित करती रही हैं। बनारस में विवाह करना उनके जीवन का सबसे सुंदर अनुभव है।

🙏 वाराणसी ने दी नई पहचान

वाराणसी की पवित्र भूमि पर संपन्न यह विवाह एक संस्कृति संगम का प्रतीक बन गया — जहां पश्चिमी जीवनशैली और भारतीय आध्यात्मिकता का सुंदर मिलन हुआ। इस विवाह ने यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कृति की सीमाएं नहीं, बल्कि आत्मा की एकता ही जीवन का सच्चा अर्थ है।

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