भगवद् गीता कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं, योग और वेदांत शिक्षा देने वाला ट्रस्ट FCRA रजिस्ट्रेशन से वंचित नहीं
नई दिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में गृह मंत्रालय के फैसले को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि भगवद् गीता किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। अदालत ने अर्शा विद्या परंपरा ट्रस्ट को FCRA पंजीकरण देने से इनकार करने वाले मंत्रालय के निर्णय को अपर्याप्त तर्क और प्रक्रियात्मक खामियों के आधार पर रद्द कर दिया।
क्या था मामला:
अर्शा विद्या परंपरा ट्रस्ट, जो वेदांत, योग, संस्कृत और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य करता है, ने 2021 में FCRA पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। मंत्रालय ने जनवरी 2025 में आवेदन खारिज कर दिया और मुख्य कारण बताया कि ट्रस्ट धार्मिक प्रतीत होता है।
कोर्ट का तर्क:
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा कि भगवद् गीता एक नैतिक और दार्शनिक ग्रंथ है, धार्मिक ग्रंथ नहीं, और इसे किसी धर्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। वेदांत और योग का शिक्षण देने से कोई संगठन धा...










