
ढाका: बांग्लादेश की नई सरकार के गठन के बाद भारत और चीन दोनों ही ढाका में सक्रिय हो गए हैं। नई प्रधानमंत्री डॉ. तारिक रहमान को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों पड़ोसी देश प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर कदम उठा रहे हैं।
भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने रविवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान से मुलाकात कर भारत की इच्छा जताई कि दोनों देश सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते हुए आपसी हित और फायदे के आधार पर मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है और लोकतांत्रिक, प्रोग्रेसिव व समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता रहेगा।
इसी दिन भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने डॉ. खलीलुर रहमान को दिल्ली आने का आमंत्रण भी भेजा। इसके पहले भारतीय उच्चायुक्त ने बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम से भी मुलाकात की, जिन्होंने पारंपरिक रूप से भारत समर्थक रुख अपनाया है।
दूसरी ओर, चीन ने भी ढाका में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। चीनी राजदूत याओ वेन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर चीन के मजबूत समर्थन का भरोसा दिलाया और उन्हें देश आने का न्योता भी भेजा। चीनी दूतावास ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग की ओर से तारिक रहमान को हार्दिक बधाई भी दी।
सूत्रों के अनुसार, तारिक रहमान बहुत सावधानी से भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। वे शुरूआत में किसी भी देश को यह संकेत नहीं देना चाहते कि बांग्लादेश उनके पाले में है। इसी रणनीति के तहत उन्होंने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए सऊदी अरब को चुना है। यह यात्रा आधिकारिक नहीं होगी, बल्कि वे मक्का में अपनी मर्जी से उमराह करने जाएंगे। इसके बाद ही उनके पहले औपचारिक विदेशी दौरे की रूपरेखा तय की जाएगी।
ढाका में राजनीतिक हलचल और कूटनीतिक दांव-पेंच इस बात का संकेत दे रहे हैं कि बांग्लादेश के लिए पड़ोसी देशों की दिलचस्पी किस हद तक बढ़ रही है।
