
रियाद: सऊदी अरब ने हालिया समय में तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। विशेष रूप से तुर्की के कान फाइटर जेट्स में रुचि ने अमेरिका को चिंता में डाल दिया है। अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब उसके F-35 वॉरप्लेन ही खरीदे, लेकिन रियाद ने अभी तक अपना निर्णय टाल रखा है।
तुर्की और पाकिस्तान के विकल्प
अमेरिका ने सऊदी से स्पष्टीकरण मांगा कि वह अन्य देशों से हथियार डील क्यों कर रहा है। इसके बाद सऊदी ने भरोसा दिलाया कि वह पाकिस्तान से JF-17 जेट्स नहीं खरीदेगा। लेकिन तुर्की के कान पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ जेट के प्रोग्राम पर कोई गारंटी नहीं दी गई। अमेरिकी अधिकारी इसे सऊदी की स्वतंत्र नीति और अमेरिकी हथियार बाजार में संभावित चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
क्या अमेरिका से दूरी बढ़ेगी?
सऊदी के नेशनल सिक्योरिटी प्रोग्राम के डायरेक्टर जनरल हेशाम अलघनम ने कहा कि सऊदी केवल नए विकल्प देख रहा है, इसका मतलब अमेरिका से दूर जाना नहीं है। सऊदी की रणनीति अमेरिका के साथ रिश्तों को खत्म करना नहीं, बल्कि अमेरिका और तुर्की दोनों विकल्पों को बनाए रखना है।
यूएई और बड़े स्ट्रेटेजिक कारण
डिफेंस एक्सपर्ट का कहना है कि सऊदी अरब अमेरिका से F-35 और तुर्की से कान जेट्स दोनों खरीद सकता है। तुर्की के साथ डील करने के पीछे यूएई के साथ बढ़ते तनाव और मध्य-पूर्व में रणनीतिक मजबूती हासिल करना है।
निष्कर्ष:
सऊदी अरब की यह पहल अमेरिका को अमेरिका के पारंपरिक हथियार निर्यात में चुनौती देती है, लेकिन रियाद अभी भी ट्रंप प्रशासन के साथ अपने रक्षा संबंधों को पूरी तरह खत्म करने की ओर नहीं बढ़ा है। सऊदी की रणनीति में विकल्प बनाए रखना और मध्य-पूर्व में अपने हित सुरक्षित करना मुख्य उद्देश्य है।
