
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में किसानों के धरने के दौरान सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासन और जनता के बीच संवाद की नई मिसाल पेश की। गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ अपनी सरकारी गाड़ी छोड़कर बाइक पर सवार होकर सीधे धरनास्थल पहुंच गए। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने किसानों के बीच खड़े होकर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। डीएम के हस्तक्षेप के बाद किसानों ने अपना धरना स्थगित करने की घोषणा कर दी।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ा है विवाद
यह मामला मोदीनगर क्षेत्र के तलहेटा गांव के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के उतार-चढ़ाव और जमीन संबंधी मुद्दों से जुड़ा हुआ है। सड़क निर्माण के दौरान किसानों की भूमि से मिट्टी उठाए जाने और सही तरीके से भराव न होने को लेकर किसान लंबे समय से नाराज थे।
किसानों ने पहले भी आंदोलन किया था, जिसे आश्वासन के बाद शांत करा दिया गया था। लेकिन रविवार को भाकियू नेता कुलदीप त्यागी के नेतृत्व में किसान एक बार फिर धरने पर बैठ गए।
जनसुनवाई के बाद डीएम खुद पहुंचे धरनास्थल
सोमवार को जनसुनवाई कार्यक्रम में किसान जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे और अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने तुरंत फैसला लेते हुए बाइक से धरनास्थल पर पहुंचकर खुद स्थिति का जायजा लिया।
डीएम को अपने बीच बाइक से आते देख किसानों के बीच माहौल बदल गया और तनाव कम होता दिखाई दिया।
मौके पर जाकर देखी समस्या, एजेंसी को लगाई फटकार
किसानों ने डीएम को बताया कि सड़क निर्माण के दौरान उनकी जमीन से मिट्टी उठाई गई थी, लेकिन बराबर भराव नहीं कराया गया। डीएम ने किसानों के साथ मौके पर जाकर हालात देखे।
उन्होंने पाया कि संबंधित एजेंसी द्वारा भराव का कार्य चल रहा है, लेकिन कई स्थानों पर कमियां हैं। इस पर डीएम ने एजेंसी कर्मियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जहां भी कमी है, उसे तत्काल ठीक किया जाए।
बिना मुआवजा जमीन न लेने का स्पष्ट निर्देश
किसानों ने गांव की पैमाइश कराने और पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही जमीन पर कब्जा देने की मांग रखी। इस पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिना विधिवत मुआवजा दिए किसी भी किसान की जमीन नहीं ली जाए।
डीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन नियमों के अनुसार ही कार्रवाई करेगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
काफी देर तक चला संवाद, किसान मान गए
धरनास्थल पर डीएम ने काफी देर तक किसानों से सीधे संवाद किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। डीएम की पहल और आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।
कौन हैं डीएम रविंद्र कुमार मांदड़?
रविंद्र कुमार मांदड़ 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से जयपुर के रहने वाले हैं। गाजियाबाद से पहले वे प्रयागराज, जौनपुर और रामपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में भी जिलाधिकारी रह चुके हैं।
उनके नेतृत्व में प्रयागराज में महाकुंभ 2025 का सफल आयोजन भी किया गया था। इससे पहले वे फिरोजाबाद में जॉइंट मजिस्ट्रेट के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
संवेदनशील प्रशासनिक छवि
यह पहली बार नहीं है जब डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने आमजन और किसानों की समस्याओं को लेकर संवेदनशीलता दिखाई हो। बीते दिसंबर में एक गरीब किसान बिजली बिल जमा करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचा था। उसकी स्थिति देखकर डीएम ने अपने पास से 5100 रुपये की सहायता राशि देकर मदद की थी।
उनकी यही संवेदनशीलता और सक्रिय प्रशासनिक शैली उन्हें जनता के बीच एक अलग पहचान दिलाती है।
