

नई दिल्ली: रिलायंस जियो ने वैश्विक स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में 15 दिग्गज टेक कंपनियों ने मिलकर Trusted Tech Alliance (TTA) की स्थापना की। इसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं और भारत से Jio Platforms इस एलायंस का इकलौता सदस्य बना है। इसका लक्ष्य AI, 5G और क्लाउड टेक्नोलॉजी के लिए ऐसे सुरक्षित और भरोसेमंद नियम बनाना है, जिससे डेटा चोरी का खतरा कम हो और तकनीक पूरी तरह पारदर्शी बने।

एलायंस में शामिल दिग्गज
TTA के संस्थापक सदस्यों में अमेज़न वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, SAP, NTT सहित कुल 15 कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का लक्ष्य डिजिटल टेक्नोलॉजी के उच्च मानक और भरोसेमंद संचालन को बढ़ावा देना है।
Jio का संकल्प
जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा, “विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। हम इस एलायंस के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें।”
वैश्विक विशेषज्ञों की राय
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ब्रैड स्मिथ, माइक्रोसॉफ्ट वाइस चेयर और प्रेसिडेंट, ने कहा कि “समान सोच वाली कंपनियों का सहयोग जरूरी है ताकि सीमाओं के पार भरोसेमंद और उच्च मानक तकनीक विकसित की जा सके।”
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बोर्ये एकहोम, एरिक्सन के सीईओ, ने कहा कि “कोई एक देश या कंपनी अकेले सुरक्षित डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है।”
भारत को मिलेगा फायदा
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एलायंस के नियमों में ईमानदार संचालन, सुरक्षा जांच, मजबूत सप्लाई नेटवर्क और डेटा सुरक्षा शामिल हैं।
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा।
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इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सेवाओं की ग्लोबल विश्वसनीयता बढ़ेगी और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा।
जियो की इस पहल से भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी साख ग्लोबल मंच पर नई ऊँचाइयों को छूने जा रही है।


