Thursday, June 25

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‘जो रामविलास पासवान ने नहीं किया, वो चिराग ने किया’ संजय पासवान के मंत्री बनते ही फूटी खुशी, भावुक हुईं मां सोनी देवी

बेगूसराय। बिहार में नए मंत्रिमंडल के गठन के साथ ही बेगूसराय के बखरी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने संजय पासवान के घर जश्न का माहौल है। पोखरिया मोहल्ले में देर रात तक ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजती रही, आतिशबाजी हुई और लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर मिठाई बांटी। परिवार के साथ पूरा मोहल्ला इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना।

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28 साल की राजनीतिक यात्रा का बड़ा मुकाम

संजय पासवान पिछले 28 वर्षों से लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) से जुड़े हैं। उन्होंने दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ लंबे समय तक काम किया और जिलाध्यक्ष से लेकर दलित सेना के प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां निभाईं।
रामविलास पासवान के निधन के बाद भी उन्होंने पार्टी में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी और चिराग पासवान के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए।
चिराग ने उन पर भरोसा दिखाते हुए इस बार उन्हें बखरी सुरक्षित सीट से टिकट दिया, जहां उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद नीतीश मंत्रिमंडल में उन्हें मंत्री बनवाकर चिराग ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया।

‘चिराग ने सब दे दिया…’ मां बोलीं, खुशी रोक नहीं पाई

संजय पासवान की मां सोनी देवी बेटे के मंत्री बनने की खबर सुनते ही फफक कर रो पड़ीं। खुशी से भरी आंखों से उन्होंने कहा—
“मेरा बेटा रामविलास जी के लिए बरसों काम करता रहा, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। चिराग बाबू ने तो आज सब दे दिया। इतनी खुशी है कि शब्द नहीं हैं।”

सोनी देवी ने कहा कि उनका बेटा हमेशा मिलनसार और हर वर्ग के लोगों की मदद के लिए तत्पर रहता है। उन्हें विश्वास है कि मंत्री बनने के बाद भी वह ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करेंगे।

परिवार और मोहल्ले में उत्सव जैसा माहौल

संजय पासवान की बहन कंचन देवी, भाइयों और पड़ोसियों ने जमकर जश्न मनाया।
मोहल्ले के बुजुर्गों ने बताया कि बचपन से ही संजय संस्कारी, विनम्र और मेहनती रहे हैं। उनकी जीत और मंत्रिपद ने पूरे मोहल्ले का सम्मान बढ़ाया है।

जनसेवा को मिलेगी नई दिशा

नए मंत्री के रूप में संजय पासवान से बखरी और बेगूसराय की जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। लोग मानते हैं कि जिस तरह उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया है, उसी तरह अब मंत्रिमंडल में रहते हुए भी विकास और जनसेवा को नई गति देंगे।

यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि 28 वर्षों की तपस्या, संघर्ष और समर्पण का फल है—जिसे देखकर आज पूरा बखरी गर्व से झूम रहा है।

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