
मध्य पूर्व में हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिका ने ईरान पर सैन्य दबाव को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाते हुए उसे चारों दिशाओं से घेर लिया है। ओमान की खाड़ी, फारस की खाड़ी, लाल सागर, अरब सागर और जॉर्डन में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की भारी तैनाती कर दी गई है। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा, चाहे इसके लिए युद्ध ही क्यों न चुनना पड़े।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़ा
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने क्षेत्र में एक और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किया है। रॉयटर्स के हवाले से एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की है कि पिछले 48 घंटों में USS डेलबर्ट डी. ब्लैक युद्धपोत मध्य पूर्व पहुंचा है। इसके साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी डिस्ट्रॉयर युद्धपोतों की संख्या छह हो गई है।
अमेरिका ने
जॉर्डन में 12 हमलावर फाइटर जेट
लाल सागर में एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर
फारस की खाड़ी में तीन युद्धपोत
ओमान की खाड़ी (होर्मुज जलडमरूमध्य के पास) दो डिस्ट्रॉयर
अरब सागर में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ तीन अतिरिक्त डिस्ट्रॉयर
तैनात कर दिए हैं।
अमेरिका की तीन शर्तें, ईरान का सख्त इनकार
जियो-पॉलिटिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका ओमान के जरिए ईरान से संपर्क में था। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान को तीन कड़ी शर्तें भेजी गईं—
- ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म करे और यूरेनियम संवर्धन क्षमताएं छोड़ दे।
- हमास, हूती विद्रोहियों और हिज्बुल्लाह जैसे क्षेत्रीय मिलिशिया समूहों को समर्थन बंद करे।
- लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना को समाप्त करे।
ईरान ने इन शर्तों को सीधे तौर पर आत्मसमर्पण के बराबर बताया है।
ईरान की युद्ध की तैयारी
लेबनान के अखबार अल-अखबार ने ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि अगर अमेरिका समझौते और युद्ध के बीच विकल्प रखता है, तो ईरान युद्ध चुनेगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को हाल ही में 1,000 नए ड्रोन सौंपे गए हैं।
ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सेना की अलग-अलग शाखाओं को ये ड्रोन दिए गए हैं। ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ अमीर हातेमी ने कहा कि,
“ईरान की सेना हर संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने रणनीतिक फायदों को लगातार मजबूत कर रही है।”
मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम
तुर्की, ओमान और कतर जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। इस बीच यूरोपीय यूनियन द्वारा IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने से तेहरान और भड़क गया है।
ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों के निशाने पर हैं और जरूरत पड़ने पर हमला किया जा सकता है।
युद्ध की ओर बढ़ते हालात
तेहरान की सड़कों पर अमेरिका के खिलाफ चेतावनी वाले पोस्टर लगाए जा चुके हैं। दोनों पक्षों के सख्त रुख को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य टकराव की आशंका अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।