
नई दिल्ली।
ईरान में बिगड़ते हालात के बीच वहां अध्ययन कर रहे भारतीय मेडिकल छात्रों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई छात्र भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन इस बीच कुछ ईरानी विश्वविद्यालयों पर उनके पासपोर्ट रोके जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने विदेश मंत्रालय (MEA) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पासपोर्ट न मिलने से छात्र परेशान
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि ईरान में पढ़ रहे कई भारतीय मेडिकल छात्रों, जिनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है, ने स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है। इसके बावजूद कुछ विश्वविद्यालय उनके पासपोर्ट वापस नहीं कर रहे हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार गंभीर चिंता में हैं।
बिगड़ते हालात के बावजूद परीक्षाएं जारी
एसोसिएशन के अनुसार, ईरान की कुछ यूनिवर्सिटीज ने खराब होते सुरक्षा हालात के बावजूद सेमेस्टर परीक्षाएं जारी रखी हैं। हालांकि कई संस्थानों ने परिस्थितियों को देखते हुए परीक्षाएं 24 मार्च तक स्थगित कर दी हैं, लेकिन कुछ विश्वविद्यालय अभी भी परीक्षा प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं।
विदेश मंत्रालय को पत्र
रविवार को जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। एसोसिएशन ने मंत्रालय से ईरानी अधिकारियों, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास और संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन से बात करने की मांग की है, ताकि छात्रों को बिना किसी देरी के उनके पासपोर्ट वापस दिलाए जा सकें।
क्या है पूरा मामला
एसोसिएशन के अनुसार, छात्रों ने अपनी ईरान इकाई को बताया कि शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज लंबे समय से बंद है और वहां के प्रशासन द्वारा छात्रों के पासपोर्ट रोके गए हैं।
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय अधिकारी कई दिनों से पासपोर्ट लौटाने में टालमटोल कर रहे हैं और जिम्मेदारी से बच रहे हैं। इससे छात्र अपनी इच्छा के विरुद्ध ईरान में फंसे हुए हैं।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता
एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा हालात में छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है और उन्हें भारत लौटने से रोका जाना गंभीर विषय है। संगठन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह इस मामले को प्राथमिकता से उठाए और छात्रों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने की दिशा में कदम उठाए।