Saturday, May 30

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यूजीसी नियमों पर सियासी-धार्मिक टकराव तेज, PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को शंकराचार्य का समर्थन

बरेली/प्रयागराज।
यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बटुक शिष्यों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। बीते 24 घंटे से सुर्खियों में चल रहे अग्निहोत्री को राज्य सरकार ने इस्तीफा स्वीकार न करते हुए अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है।

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इसी बीच प्रयागराज माघ मेले में उपस्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने फोन पर अलंकार अग्निहोत्री से बातचीत की और उनके कदम को सनातन धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक बताया। शंकराचार्य ने कहा कि पूरा सनातन समाज उनके साहसिक निर्णय का अभिनंदन करता है।

“धर्म के क्षेत्र में सरकार से बड़ा पद देंगे”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बातचीत में कहा,
“एक ओर हमें दुख है कि आपने वर्षों की मेहनत से पाया हुआ पद एक झटके में खो दिया, लेकिन दूसरी ओर सनातन धर्म के प्रति आपकी निष्ठा से पूरा सनातनी समाज आह्लादित है। जो पद सरकार ने आपको दिया था, उससे बड़ा पद हम आपको धर्म के क्षेत्र में देने का प्रस्ताव रखते हैं।”

सख़्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं अग्निहोत्री

प्रांतीय प्रशासनिक सेवा के 2019 बैच के अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। वे उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ सहित कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं और प्रशासनिक गलियारों में अपनी स्पष्ट सोच व सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी को ई-मेल के माध्यम से इस्तीफा भेजा था।

बटुक शिष्यों की पिटाई पर उठाए सवाल

गणतंत्र दिवस समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने कहा कि बीते दो सप्ताह में दो घटनाओं ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाते समय शंकराचार्य के बटुक शिष्यों के साथ चोटी खींचकर मारपीट की गई, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने माघ मेला प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

“अब इस तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकता”

अपने इस्तीफे में अग्निहोत्री ने लिखा कि वे अब ऐसे तंत्र का हिस्सा नहीं रह सकते जहां न जनतंत्र बचा है, न गणतंत्र—केवल “गनतंत्र” शेष रह गया है। उन्होंने कहा कि जब नीतियां समाज को विभाजित करने लगें, तो विरोध करना आवश्यक हो जाता है।

यूजीसी नियमों को बताया ‘काला कानून’

अग्निहोत्री ने यूजीसी विनियम 2026 को ‘काला कानून’ बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इन प्रावधानों से ब्राह्मण समुदाय पर अत्याचार होगा और इससे सामाजिक अशांति व आंतरिक असंतोष को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

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