
नई दिल्ली। दुनिया इस समय भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति में टैरिफ और कठोर नीतियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे अमेरिका की छवि “दुनिया का बॉस” के रूप में मजबूत हुई है। हालांकि भारत सहित कई देश ट्रंप के दबाव में घुटने नहीं टेक रहे हैं।
ट्रंप की नीतियों और वैश्विक तनावों के चलते वर्ल्ड ऑर्डर बदलने के संकेत मिल रहे हैं। चीन, रूस और यूरोपीय संघ के अपने-अपने स्वार्थ हैं, लेकिन भारत इस नए वैश्विक ढांचे में अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत और यूरोप के बढ़ते संबंध
यूरोप अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करके एक नई संप्रभु पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। इस प्रक्रिया में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मजबूत साझेदारी की अपार संभावनाएं बन रही हैं, जो व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) की उम्मीद है, जो आर्थिक संबंधों को और गहरा करेगा।
ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने नए कार्यकाल में अपनी पहली विदेश यात्रा फरवरी 2025 में भारत की की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूरोप यात्राओं और EU के प्रमुख देशों के नेताओं की भारत यात्राओं ने दोनों क्षेत्रों के बीच संबंधों को और मजबूत किया है।
अमेरिका से दूरी और भारत का अवसर
ट्रंप के रवैये से उभरती चुनौतियों के बीच यूरोप अब अमेरिका से स्वतंत्र और संप्रभु भविष्य का निर्माण करना चाहता है। इसके लिए यूरोप के पास बौद्धिक, औद्योगिक और वित्तीय क्षमता है, और ऐसे भरोसेमंद साझेदारों की आवश्यकता है जो प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग पर आधारित हों। भारत इस साझेदारी के लिए स्वाभाविक विकल्प बनता जा रहा है।
भारत और यूरोप की साझेदारी रणनीति के हर आयाम को प्रभावित करती है। ईयू और भारत के बीच बढ़ते संबंध, विशेषकर ‘न्यू स्ट्रेटेजिक ईयू-इंडिया एजेंडा 2025’, दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं। FTA के साथ-साथ ईयू के निवेश और व्यापार में वृद्धि भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक अवसर भी ला रही है।
फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और नॉर्डिक देश भारत को विश्वसनीय और प्राथमिक साझेदार मान रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
निष्कर्ष
ट्रंप की कठोर नीतियों ने वैश्विक शक्ति संतुलन को चुनौती दी है, लेकिन भारत के लिए यह अवसर भी है। यूरोप के साथ मजबूत साझेदारी और स्वतंत्र रणनीतिक निर्णय भारत को वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली खिलाड़ी बना सकते हैं।