नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई खटास का ठीकरा युनूस प्रशासन पर फोड़ा है। एनबीटी से खास बातचीत में हसीना ने कहा कि बांग्लादेश में भारतीय मिशनों पर घेराबंदी, प्रदर्शन और राजनयिक प्रतिनिधियों को डराने-धमकाने की घटनाओं को नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि कट्टरपंथियों को शह देने और तुष्टिकरण की नीति ने मौजूदा माहौल बनाया, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा।
युनूस प्रशासन और अल्पसंख्यकों की चिंता
हसीना ने बताया कि युनूस प्रशासन के तहत बांग्लादेश के विविधतापूर्ण समाज को चुनौती मिल रही है। हिंदू, बौद्ध, ईसाई और अहमदी मुसलमान समुदायों के खिलाफ लगातार चिंता जनक घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव भी लोकतांत्रिक विकल्पों से रहित हैं और केवल “नाम के चुनाव” बनकर रह गए हैं।
हसीना ने आरोप लगाया कि बिना जमात-ए-इस्लामी या BNP के नॉमिनेशन फॉर्म खरीदे बिना अन्य उम्मीदवारों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में जब बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार और कानून का शासन लौटेगा, तब दोनों देशों के संबंध फिर से सहयोगात्मक होंगे।
खालिदा जिया के बेटे पर निशाना
इस दौरान पूर्व पीएम ने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता जानती है कि तारिक रहमान लंबे समय तक लंदन में रहे और आम लोगों की परेशानियों से उनका कोई सरोकार नहीं रहा। हसीना ने बीएनपी पर शॉर्ट टर्म हितों के लिए चरमपंथियों से करीबी का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी सरकार ने इन तत्वों पर लगाम लगाने के लिए कड़ी मेहनत की थी।