
बीजिंग: अफ्रीका में अपने भारी निवेश के बावजूद चीन अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) प्रोजेक्ट अब बीजिंग के लिए चुनौती बन गया है। ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि साल 2024 में अफ्रीकी देशों के लिए चीन का कर्ज लगभग आधा होकर 2.1 अरब डॉलर रह गया। यह कोविड-19 महामारी के बाद पहली सालाना गिरावट है और अफ्रीका में चीन की नीतियों में बदलाव की स्पष्ट झलक देती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अब अरबों डॉलर के बड़े ढांचागत प्रोजेक्ट्स के युग से धीरे-धीरे हटकर छोटे, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
चीन ने बदला मॉडल
2012 से 2018 के बीच अफ्रीकी देशों को चीन से सालाना 10 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज मिलता रहा। यह पैसा मुख्यतः रेलवे, राजमार्ग, बंदरगाह और बिजली संयंत्र जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए दिया जाता था। पर हाल के वर्षों में यह मॉडल दबाव में आया। महामारी, बढ़ती ब्याज दरें और कुछ अफ्रीकी देशों में कर्ज संकट जैसे अनुभवों ने चीन को बड़े प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाने पर मजबूर किया।
अब चीन का ध्यान छोटे पैमाने के निवेश और FDI जैसी वित्तीय योजनाओं की ओर केंद्रित है। साथ ही, बीजिंग ने अमेरिकी डॉलर की बजाय अपने ही युआन का इस्तेमाल बढ़ाकर डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है। उदाहरण के लिए, साल 2024 में केन्या के सभी लोन युआन में थे, जबकि अक्टूबर में चीन ने 3.5 अरब डॉलर के मौजूदा लोन को युआन में बदल दिया।
रणनीति का नया चेहरा
विश्लेषकों का कहना है कि चीन अफ्रीका से दूरी नहीं बना रहा, बल्कि रणनीतिक बदलाव कर रहा है। बीजिंग अब कर्ज के जोखिम कम करने, डिफाल्ट को सीमित करने और विदेशी फाइनेंसिंग को मार्केट आधारित रिटर्न के साथ जोड़ने पर जोर दे रहा है। इसका मतलब है कि अब अफ्रीका में बड़े चीनी लोन के दिन खत्म हो सकते हैं और छोटे, चुने हुए प्रोजेक्ट्स के माध्यम से टिकाऊ विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की यह नई चाल न केवल अफ्रीका में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए है, बल्कि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुसत्ता को चुनौती देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।