
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील महेश तिवारी की याचिका खारिज कर दी। वकील ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया।
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने का कोई इरादा नहीं रखा था और अब वह अत्यंत पश्चातापी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वे माफी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
मामले का हाल
16 अक्टूबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट की कोर्ट नंबर 24 में महेश तिवारी द्वारा कार्यवाही बाधित करने की घटना हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद पांच न्यायाधीशों की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना का मामला दर्ज किया।
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “समस्या क्या है? वह क्यों नहीं जा सकता? वह जाकर माफी मांग सकता है। अगर उसे लगता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया, तो भी सम्मानपूर्वक माफी मांग सकता है। किसी को दबाव में नहीं लाया जा रहा।” उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “क्या बिगाड़ लिया मेरा, सुप्रीम कोर्ट से आदेश ले आया।”
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि न्यायिक पदानुक्रम में ऐसे टकराव पेशेवर गौरव का विषय बन सकते हैं, लेकिन आवश्यक है कि वकील सम्मानपूर्वक अपनी गलती स्वीकार करें।
हाईकोर्ट का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने प्रारंभिक रूप से कहा था कि वकील का कथन आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है और रजिस्ट्री को स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखते हुए केवल माफी की शर्त जोड़ दी।