Saturday, January 24

1984 सिख विरोधी दंगे: DSGMC सज्जन कुमार के बरी होने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देगी

 

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नई दिल्ली: दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगे के एक मामले में कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को बरी करने वाले निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया। राउज एवेन्यू जिला अदालत ने गुरुवार को जनकपुरी क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

 

भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप:

DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह कहलों ने बयान में कहा कि 1-2 नवंबर 1984 को तीन सिखों की हत्या हुई थी और पांच गवाहों ने अपने बयान में बताया था कि हत्याओं के लिए जिम्मेदार भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार कर रहे थे। इसके बावजूद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

 

समिति ने कहा कि फैसले की प्रति मिलने के बाद उसका विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और फिर उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी जाएगी। हाई कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज कराकर DSGMC यह सुनिश्चित करेगी कि सज्जन कुमार को इस मामले में भी सजा मिले।

 

मुख्य गवाह की मौत:

बयान में कहा गया कि इस मामले के मुख्य गवाह रविंद्र सिंह कोहली की मौत हो चुकी है। कोहली ने देखा था कि उनके साथियों अवतार सिंह और सोहन सिंह की भीड़ ने हत्या की थी। उनकी गवाही बेहद महत्वपूर्ण थी, लेकिन उनकी मौत के कारण इसे दर्ज नहीं किया जा सका।

 

42 साल बाद बरी होने से दुख:

DSGMC ने कहा कि अदालत का यह फैसला सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करता है। 42 साल बाद भी आरोपी का बरी होना बेहद दुखद है। समिति ने सज्जन कुमार पर उनके तत्कालीन संसदीय क्षेत्र पश्चिम दिल्ली में भीड़ को उकसाने का आरोप लगाया। DSGMC ने यह भी कहा कि अन्य मामलों में उन्हें दी गई आजीवन कारावास की सजा साबित करती है कि सज्जन कुमार ही भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे।

 

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