Sunday, May 31

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यूक्रेन युद्ध में Su-57 को झटका रूसी पांचवीं पीढ़ी के जेट पर सवाल, भारत समेत दुनिया कर सकती है खरीद पर पुनर्विचार

 

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मॉस्को/कीव: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। यूक्रेनी वायुसेना ने कहा है कि उसने युद्ध के मैदान में Su-57 की क्षमताओं को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर दिया है। इस दावे को रूस की वैश्विक हथियार बिक्री रणनीति के लिए गंभीर झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Su-57 के संभावित खरीदार—जिनमें भारत भी शामिल है—अपनी खरीद योजना पर दोबारा विचार कर सकते हैं।

 

यूक्रेनी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक MiG-29 पायलट ने बताया कि रूस ने डोनेत्स्क क्षेत्र में Su-57 को जानबूझकर तैनात किया था, ताकि युद्ध में इसकी सफलता दिखाकर इसे वैश्विक बाजार में बेचा जा सके। हालांकि, यूक्रेन का दावा है कि उसकी वायुसेना ने रूस को किसी भी तरह की “प्रचारात्मक जीत” हासिल नहीं करने दी।

 

‘एक भी सफलता नहीं दिखा सका Su-57’

 

रेडियो स्वोबोडा से बातचीत में यूक्रेनी पायलट ने कहा,

“रूस चाहता था कि Su-57 हमारे किसी विमान को मार गिराए, ताकि उसे एक्सपोर्ट के लिए विश्वसनीय साबित किया जा सके। हमने इसके ऑपरेशनल व्यवहार को परखा और ऐसी कोई सफलता सामने नहीं आने दी, जिसे रूस दुनिया को दिखा सके।”

 

यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस लगातार Su-57 को अपनी सैन्य तकनीक का फ्लैगशिप प्रोडक्ट बताकर प्रचारित कर रहा है।

 

रूस का दावा, लेकिन दुनिया सशंकित

 

Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे अमेरिका के F-35 और F-22 रैप्टर के जवाब के तौर पर विकसित किया गया। मॉस्को ने इसे कई देशों को बेचने की कोशिश की है, लेकिन अब तक अल्जीरिया ही इसका एकमात्र पक्का विदेशी ग्राहक है।

 

पश्चिमी रक्षा विश्लेषक लंबे समय से इस विमान की स्टील्थ क्षमता, सेंसर सिस्टम और युद्धक्षमता पर सवाल उठाते रहे हैं। अब यूक्रेन के दावे ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।

 

भारत भी संभावित खरीदारों में

 

रूस पिछले दो–तीन वर्षों से भारत को Su-57 बेचने की कोशिश कर रहा है। प्रस्ताव में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, भारत निर्मित हथियार प्रणालियों के एकीकरण और संयुक्त उत्पादन जैसे विकल्प शामिल बताए जाते हैं। हालांकि, भारत ने अब तक इस डील को हरी झंडी नहीं दी है।

 

भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि

 

राफेल स्क्वाड्रन की तत्काल जरूरतों को पूरा करता है

जबकि Su-57 को स्टील्थ क्षमता के “गैप” को भरने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था

 

लेकिन Su-57 को लेकर बढ़ते संदेह भारत के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।

 

खूबियां भी, कमजोरियां भी

 

Su-57 एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवाई श्रेष्ठता, जमीनी हमले, टोही और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में सक्षम बताया जाता है। इसमें लंबी दूरी की R-37M मिसाइल (300–400 किमी) और हाइपरसोनिक हथियार ले जाने की क्षमता है।

 

इसके बावजूद विशेषज्ञ दो बड़ी कमियों की ओर इशारा करते हैं—

 

  1. अमेरिकी स्टील्थ विमानों के मुकाबले कमजोर लो-ऑब्जर्वेबिलिटी
  2. यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी प्रतिबंधों से सीमित उत्पादन क्षमता

 

रूस के लिए बढ़ी मुश्किल

 

विश्लेषकों का मानना है कि अगर यूक्रेन युद्ध में Su-57 अपनी प्रभावशीलता साबित नहीं कर पाया, तो रूस के लिए इसे दुनिया को बेचना और कठिन हो जाएगा। F-35 जैसे विमानों के प्रभुत्व वाले बाजार में Su-57 की राह पहले ही कठिन थी, और अब यूक्रेन का यह दावा मॉस्को की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

 

 

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