Monday, January 19

कई राज्यों में मुफ्त बिजली के बावजूद, डिस्कॉम ने कमाया ₹2,700 करोड़ का मुनाफा

 

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नई दिल्ली: कई राज्यों में मुफ्त बिजली वितरण की व्यवस्था के बावजूद भारत की सरकारी और निजी बिजली कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2,700 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। यह पिछले वर्षों के भारी घाटे के बाद एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।

 

विद्युत मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी वितरण कंपनियों के बेहतर प्रबंधन और प्रदर्शन ने इस सकारात्मक परिणाम में अहम भूमिका निभाई है। इससे पहले इन कंपनियों को बड़े पैमाने पर घाटे का सामना करना पड़ रहा था।

 

क्यों हुआ मुनाफा:

केंद्र सरकार ने बताया कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, स्मार्ट मीटरों के तेजी से विस्तार और सब्सिडी के पारदर्शी प्रबंधन जैसे कदमों से बिजली वितरण कंपनियों का प्रदर्शन सुधरा है। खासकर सब्सिडी का सही प्रावधान महत्वपूर्ण साबित हुआ है। कई राज्य उपभोक्ताओं को एक निश्चित सीमा तक मुफ्त बिजली देते हैं, और यदि इसका वित्तीय प्रावधान सही ढंग से नहीं होता, तो इसका बोझ सीधे कंपनियों पर पड़ता।

 

इसके अलावा, वितरण कंपनियों के लिए समान प्रणाली लागू करना, वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाना, कानूनी अनुबंधों का पालन और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना जैसे कदम भी लाभप्रद साबित हुए हैं। इससे नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिला है।

 

सुधारों का असर:

विद्युत क्षेत्र में हो रहे सुधार सिर्फ मुनाफे तक ही सीमित नहीं हैं। तकनीकी और वाणिज्यिक (AT&C) नुकसान 2013-14 में 22.6% से घटकर 2024-25 में 15% हो गया है। देर से भुगतान पर सरचार्ज नियमों के कारण जनरेटिंग कंपनियों के बकाया भुगतान में भी भारी कमी आई है। जनवरी 2026 तक यह बकाया केवल 4,927 करोड़ रुपये रह गया, जो 2022 में 1.4 लाख करोड़ रुपये था।

 

PwC इंडिया के पार्टनर संबितोष मोहपात्रा ने कहा कि कुछ राज्यों में वितरण कंपनियों का मुनाफे में लौटना केवल अकाउंटिंग सुधार नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। बेहतर बिलिंग प्रक्रिया, सब्सिडी का सही प्रबंधन और टैरिफ सुधार इसके मुख्य कारण हैं।

 

हालांकि, उनका यह भी कहना है कि वितरण कंपनियों के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। 2022-23 में इन कंपनियों का कुल घाटा 6.8 लाख करोड़ रुपये था।

 

 

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