
मुंबई। दिग्गज गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने संगीतकार ए.आर. रहमान के उस बयान को सिरे से खारिज किया है, जिसमें रहमान ने पिछले आठ वर्षों से बॉलीवुड में काम कम मिलने के पीछे संभावित ‘सांप्रदायिक’ कारणों की बात कही थी। जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ और रहमान को आज भी भरपूर सम्मान मिलता है।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में जावेद अख्तर ने कहा, “मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया। मैं मुंबई में लोगों से मिलता हूं और वे सभी ए.आर. रहमान का बहुत सम्मान करते हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडस्ट्री में रहमान की प्रतिष्ठा आज भी उतनी ही ऊंची है।
जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि काम की कमी को लेकर लोगों की धारणा रहमान के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से जुड़ी हो सकती है। उनके मुताबिक, “लोग सोच सकते हैं कि रहमान वेस्ट में बहुत व्यस्त हो गए हैं। उनके बड़े-बड़े शो होते हैं, जिनमें काफी समय और कमिटमेंट लगता है। इसलिए यह माना जा सकता है कि वह फिल्मों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं रहते।”
इसके अलावा, जावेद अख्तर ने यह तर्क भी रखा कि ए.आर. रहमान का कद इतना बड़ा है कि कई छोटे निर्माता उनसे संपर्क करने में हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा, “रहमान इतने बड़े नाम हैं कि एक छोटा प्रोड्यूसर भी उनके पास जाने से डर सकता है। लेकिन मैं यह भरोसा दिलाना चाहता हूं कि उनसे संपर्क करना मुश्किल नहीं है। अगर कोई उनसे संपर्क करेगा, तो वह जरूर जवाब देंगे। इसमें कोई सांप्रदायिक तत्व नहीं है।”
गौरतलब है कि हाल ही में BBC एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में ए.आर. रहमान ने कहा था कि पिछले करीब आठ वर्षों से उन्हें बॉलीवुड में अपेक्षाकृत कम काम मिल रहा है। उन्होंने बदलते पावर डायनेमिक्स का जिक्र करते हुए कहा था कि फैसले अब ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो क्रिएटिव नहीं हैं, और इसके पीछे कोई ‘सांप्रदायिक सोच’ भी हो सकती है, हालांकि वह उनके सामने सीधे तौर पर नहीं आती।
रहमान ने यह भी कहा था कि कई बार उन्हें “चाइनीज व्हिस्पर्स” की तरह खबरें मिलती हैं कि उन्हें किसी प्रोजेक्ट के लिए बुक किया गया था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनी ने कई अन्य कंपोजरों को हायर कर लिया। इस पर उनकी प्रतिक्रिया यही रहती है कि वह इस समय को परिवार के साथ बिताने का अवसर मान लेते हैं।
जावेद अख्तर के बयान के बाद यह स्पष्ट होता है कि फिल्म इंडस्ट्री के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं, लेकिन उनके अनुसार ए.आर. रहमान के साथ किसी भी तरह के सांप्रदायिक भेदभाव की बात तथ्यात्मक नहीं है।