
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत महाराष्ट्र की 29 नगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे सामने आने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे की पहली प्रतिक्रिया आई है। बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी)–मनसे गठबंधन को अपेक्षित सफलता न मिलने के बावजूद राज ठाकरे ने हार स्वीकार करते हुए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया और एक बार फिर मराठी अस्मिता का मुद्दा मजबूती से उठाया।
राज ठाकरे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने एकनाथ शिंदे गुट पर ‘जयचंद’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए तीखा हमला बोला था। चुनाव नतीजों के बाद ठाकरे बंधुओं की यह पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
‘यह सत्ता नहीं, वजूद की लड़ाई है’
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह चुनाव आसान नहीं था। उन्होंने कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए कहा कि मनसे को इस बार उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली, लेकिन पार्टी निराश होने वालों में से नहीं है।
उन्होंने लिखा, “यह लड़ाई सत्ता की नहीं, बल्कि मराठी लोगों, मराठी भाषा, मराठी पहचान और महाराष्ट्र के वजूद की है। ऐसी लड़ाइयां लंबी चलती हैं।”
बीएमसी में मराठी हितों पर नजर
राज ठाकरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बीएमसी में चुने गए मनसे के नगरसेवक मजबूती से काम करेंगे। अगर उन्हें लगेगा कि मराठी लोगों के खिलाफ कुछ भी हो रहा है, तो वे उसका कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी ताकतें मराठी समाज को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगी, इसलिए एकजुट रहना जरूरी है।
यूबीटी की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया
बीएमसी नतीजों के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की भी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शिवशक्ति गठबंधन के सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों को बधाई दी और कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
पोस्ट में कहा गया, “यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मराठी आदमी को उसका उचित सम्मान नहीं मिलता।”
बीएमसी का चुनावी गणित
227 सदस्यीय मुंबई महानगरपालिका में भाजपा–शिंदे गठबंधन को 118 सीटें मिली हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि मनसे को 6 सीटें मिलीं। कांग्रेस के खाते में 24, अजित पवार गुट को 3 और अन्य के खाते में 10 सीटें गई हैं।
‘मराठी हमारी सांस है’
अपने संदेश के अंत में राज ठाकरे ने लिखा, “चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सांस मराठी है। अब वक्त है संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का और फिर से काम में जुटने का।”
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद यह साफ है कि महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता और ठाकरे राजनीति का संघर्ष अभी थमा नहीं है।