Wednesday, January 14

‘प्रगति’ क्या है? सीएम योगी ने बताया नए भारत की कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण, बदली यूपी की सूरत

 

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘प्रगति’ मॉडल की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही के समन्वय से मिलने वाले ठोस परिणामों का सशक्त उदाहरण है।

 

सीएम योगी ने बताया कि प्रगति की शुरुआत वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ प्रणाली के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। इसे आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के रूप में विकसित किया गया, जिससे मेगा प्रोजेक्ट्स, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म में समयबद्ध समाधान संभव हुआ।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल समीक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि व्यापक गवर्नेंस सुधार है। इसने प्रशासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की ओर अग्रसर किया। इसके चलते निर्णय प्रक्रिया तेज हुई, समय और लागत की बर्बादी रोकी गई और केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत हुआ।

 

राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव की बात करते हुए सीएम ने बताया कि इसके माध्यम से 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री स्वयं करते हैं, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान हो चुका है।

 

उत्तर प्रदेश में प्रगति मॉडल को गेम चेंजर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश अब देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो, बेहतर एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।

 

सीएम ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 330 परियोजनाएं प्रगति के अंतर्गत हैं, जिनकी कुल लागत 10.48 लाख करोड़ रुपये है। इनमें से 128 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 202 परियोजनाएं समयबद्ध प्रगति पर हैं। इंटर-एजेंसी बाधाओं का समाधान भी प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रभावी ढंग से हो रहा है।

 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति ने उत्तर प्रदेश को रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। प्रदेश में कुल 515 मुद्दों में से 494 (96%) का समाधान हो चुका है। यह प्रशासनिक तत्परता और निर्णायक नेतृत्व का स्पष्ट प्रमाण है।

 

सीएम ने अंत में कहा कि डबल इंजन सरकार और प्रगति मॉडल के कारण उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है और राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार मजबूत हो रहा है।

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