Wednesday, January 14

ग्रीनलैंड पर अमेरिका से टकराव: यूरोप लागू कर सकता है आर्टिकल 42.7, NATO भी सतर्क

 

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वॉशिंगटन/कोपेनहेगन, 14 जनवरी: ग्रीनलैंड को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कब्जे की धमकी के बीच यूरोपीय देशों ने अब ठोस रुख अपनाने का मन बना लिया है। बुधवार को वाइट हाउस में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात करेंगे, जिसमें साफ कहा जाएगा कि ‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और डेनमार्क के नियंत्रण में ही रहेगा।’

 

NATO ने आर्कटिक में सुरक्षा बनाए रखने के लिए अगले कदमों पर चर्चा शुरू कर दी है। वहीं, यूरोपीय संघ (EU) अपने आपसी रक्षा प्रावधान आर्टिकल 42.7 को लागू करने पर विचार कर रहा है। इसका मतलब है कि अगर किसी EU सदस्य देश पर हमला होता है, तो अन्य सदस्य देशों को उसकी पूरी ताकत से मदद करनी होगी।

 

आर्टिकल 42.7 क्या है?

 

यह TEU संधि का सुरक्षा क्लॉज है।

किसी सदस्य देश पर हथियारों से हमला होने पर सैन्य सहायता देना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।

तटस्थ देशों (जैसे आयरलैंड और ऑस्ट्रिया) को इस क्लॉज का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती।

अब तक केवल फ्रांस ने इसे लागू किया था, पेरिस में 2015 के आतंकवादी हमलों के बाद।

 

यदि EU आर्टिकल 42.7 लागू करता है, तो डेनमार्क और ग्रीनलैंड को सैन्य मदद भेजने का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि सभी सदस्य देशों को सैनिक भेजने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, कुछ तटस्थ देशों को छूट दी गई है।

 

NATO के प्रवक्ता ने कहा कि महासचिव मार्क रुट्टे ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन रूस, चीन और अन्य संभावित खतरों से सुरक्षा बनाए रखने पर काम कर रहा है।

 

ग्रीनलैंड और डेनमार्क के डिप्लोमेट्स फिलहाल अमेरिका के विशेष दूत जेफ लैंड्री से सीधे संपर्क में नहीं हैं। स्थिति बेहद संवेदनशील है और आज निर्णायक दिन माना जा रहा है।

 

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