
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। धान बेचने के लिए टोकन नहीं मिलने से परेशान एक किसान ने कीटनाशक पीकर आत्महत्या की कोशिश कर ली। किसान की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
यह मामला हरदी बाजार थाना क्षेत्र के कोरबी गांव का है। पीड़ित किसान की पहचान सुमेर सिंह गोड़ के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, किसान को इस सीजन में करीब 68 क्विंटल धान बेचना था, लेकिन लंबे समय से प्रयास के बावजूद उसे धान खरीदी का टोकन नहीं मिल पा रहा था। इसी मानसिक तनाव में आकर उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।
मोबाइल नहीं, सिस्टम ने कर दिया बेबस
परिजनों ने बताया कि किसान के पास मोबाइल फोन नहीं है, जिससे वह ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा था। ऑफलाइन टोकन के लिए वह पटवारी से लेकर तहसील कार्यालय तक चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। लगातार निराशा और आर्थिक दबाव ने उसे इस हद तक तोड़ दिया कि उसने जहर पी लिया।
कलेक्टर का कड़ा रुख, तत्काल कार्रवाई
घटना सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी कामिनी कारे को रकबा सत्यापन में लापरवाही के आरोप में निलंबित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही हरदी बाजार तहसीलदार अभिजीत राजभानु को पर्यवेक्षण में कमी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने साफ संकेत दिए हैं कि किसानों से जुड़ी लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अस्पताल पहुंचीं सांसद, सरकार पर साधा निशाना
किसान की हालत जानने के लिए कोरबा से कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। सांसद ने कहा,
“जहां आदिवासी मुख्यमंत्री होने का दावा किया जा रहा है, वहीं आदिवासी किसान जहर खाने को मजबूर हो रहा है। सरकार के किसान हितैषी दावे केवल कागजों तक सीमित हैं।”
यह घटना न सिर्फ एक किसान की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि धान खरीदी व्यवस्था, डिजिटल सिस्टम और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि किसान की जान बचे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।