
सर्दियों में ठंड से बचाव के लिए मोटी स्वेटर पहनना आम तरीका है। लेकिन कई बार स्वेटर पहनने के बावजूद शरीर को गर्मी का अहसास नहीं होता। इसका कारण केवल मोटी कपड़े पहनना नहीं, बल्कि सही स्वेटर और पहनने के तरीके का ध्यान न रखना होता है।
स्वेटर पहनने के बाद भी ठंड लगने के मुख्य कारण:
- गलत कपड़े का चयन:
बाजार में कई तरह की स्वेटर मिलती हैं। 100% कॉटन की स्वेटर गर्मी बनाए रखने में असफल रहती है। पतली या बड़ी होल वाली स्वेटर भी हवा आरपार कर देती है। लूज स्वेटर पहनने से भी शरीर ठंड महसूस करता है। - पुरानी स्वेटर का इस्तेमाल:
बार-बार धोने से ऊन के रेशे ढीले और पतले हो जाते हैं, जिससे हवा अंदर और बाहर आसानी से जा सकती है। इसलिए पुरानी घिसी हुई स्वेटर गर्मी बनाए रखने में सक्षम नहीं रहती। - ऊनी स्वेटर ही बेहतर विकल्प:
ऊन प्राकृतिक इंसुलेशन प्रदान करती है। इसके रेशों में हवा रोकी जाती है, जिससे शरीर लंबे समय तक गर्म रहता है। - कश्मीरी स्वेटर का इस्तेमाल:
कश्मीरी ऊन हल्की होने के बावजूद मजबूत होती है। यह ठंड से बचाने के साथ लुक को भी लग्जरी बनाती है। इसकी गुणवत्ता सालों तक बनी रहती है और सेंसिटिव स्किन वालों के लिए भी सुरक्षित है। - नेकलाइन का ध्यान:
गहरी नेकलाइन वाली स्वेटर छाती को पूरी तरह ढक नहीं पाती। राउंड या हाई नेकलाइन वाली स्वेटर बेहतर विकल्प है। अगर नेकलाइन गहरी हो तो मफलर या स्टॉल का उपयोग करें। - लेयरिंग का सही तरीका:
मौसम के अनुसार लेयरिंग जरूरी है। अधिक ठंड में स्वेटर के नीचे बॉडी वार्मर और ऊपर जैकेट पहनें। हल्की ठंड में सिर्फ स्वेटर पर्याप्त होती है।
इन आसान लेकिन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखने से स्वेटर पहनने के बाद भी शरीर ठंड महसूस नहीं करेगा और लुक भी स्टाइलिश बना रहेगा।