Monday, January 12

स्ट्रोक के 38% मरीज 24 घंटे बाद पहुंचते हैं अस्पताल, ICMR स्टडी में गंभीर चेतावनी

नई दिल्ली: भारत में स्ट्रोक के मरीज अस्पताल पहुंचने में हो रही देरी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की नई स्टडी के मुताबिक, लगभग 38% स्ट्रोक मरीज लक्षण शुरू होने के 24 घंटे बाद अस्पताल पहुँचते हैं, जिससे इलाज और जान बचाने की संभावना कम हो जाती है।

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स्टडी के अनुसार, तीन महीने के भीतर 28% मरीजों की मौत हो जाती है और करीब 30% मरीज गंभीर रूप से अपंग हो जाते हैं। यह अध्ययन देश के 30 बड़े अस्पतालों में भर्ती 34,792 मरीजों के डेटा पर आधारित है और इसे 7 जनवरी 2026 को इंटरनैशनल जर्नल ऑफ स्ट्रोक में प्रकाशित किया गया। प्रमुख लेखक हैं डॉ. प्रशांत माथुर, ICMR, बेंगलुरु।

 

स्ट्रोक अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं

  • हर सात में एक मरीज 45 साल से कम उम्र का है।
  • सबसे बड़ा जोखिम कारक: हाई ब्लड प्रेशर (75% मरीजों में पाया गया)
  • अन्य कारक: तंबाकू का सेवन और डायबिटीज
  • शुरुआती 4.5 घंटे (गोल्डन पीरियड) बेहद अहम हैं; इसी दौरान इलाज मिलने पर जान और दिमाग दोनों बच सकते हैं।

 

स्ट्रोक के मुख्य लक्षण – FAST फॉर्मूला

  • F (Face / चेहरा): चेहरा एक तरफ झुकना या मुस्कुराने में दिक्कत।
  • A (Arm / हाथ): हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, हाथ उठाने में परेशानी।
  • S (Speech / बोलने में दिक्कत): बोली लड़खड़ाना, साफ बात न कर पाना।
  • T (Time / समय): लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचे।

 

स्ट्रोक आने पर तुरंत क्या करें

  • एक मिनट भी बर्बाद न करें, मरीज को नजदीकी बड़े अस्पताल ले जाएं।
  • एंबुलेंस बुलाएं; खुद दवा देने की कोशिश न करें।
  • मरीज को कुछ खिलाएं या पिलाएं नहीं
  • लक्षण शुरू होने का सटीक समय डॉक्टर को बताएं
  • मरीज की बीपी, शुगर और हार्ट की जानकारी डॉक्टर को दें।

 

निष्कर्ष:
ICMR की स्टडी साफ़ चेतावनी देती है कि समय पर इलाज मिलने से स्ट्रोक मरीजों की जान और जीवन गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। शुरुआती पहचान और तुरंत अस्पताल पहुंचना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

 

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